talkh lehje roz sahta hooñ magar main | तल्ख़ लहजे रोज़ सहता हूँ मगर मैं

  - Furkan Ansari
तल्ख़लहजेरोज़सहताहूँमगरमैं
कुछनहींकहताचलाजाताहूँघरमैं
एकपलकीबातथीवोपलआया
कितनाअच्छाहोतामरजाताअगरमैं
ख़ूब-सूरतकितनेथेवोउनदिनोंपल
गुलहुआकरतीथीवोपागलशजरमैं
कोईतोहोजोसँभालेउम्रमेरी
लापतासाफिररहाहूँदरदरमैं
हारनालाज़िमहैमेराइसलिएभी
ज़िन्दगीहैबाहुनरऔरबेहुनरमैं
  - Furkan Ansari
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