shehr-dar-shehr bas ik yaad li.e firta hooñ | शहर-दर-शहर बस इक याद लिए फिरता हूँ

  - Furkan Ansari
शहर-दर-शहरबसइकयादलिएफिरताहूँ
मैंतिरेनामकीफ़रियादलिएफिरताहूँ
कभीआकरमुझेआबादज़मानादेखे
किसतरहख़ुदकोमैंबर्बादलिएफिरताहूँ
येजोदस्तूरहैदुनियाकारुलानेवाला
ऐसेदस्तूरपेमैंशादलिएफिरताहूँ
कोईबतलाएमोहब्बतकाभरमरक्खूँकहाँ
सरपेतोइज़्ज़त-ए-अज्दादलिएफिरताहूँ
ज़िंदारहनेकासबबइकमिरायेभीहैदोस्त
ख़्वाबकुछहैंजोतेरेबादलिएफिरताहूँ
  - Furkan Ansari
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