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Firdous khan
zakham khaate khaate chhoda saath dam ne maazrat
zakham khaate khaate chhoda saath dam ne maazrat | ज़ख़्म खाते खाते छोड़ा साथ दम ने माज़रत
- Firdous khan
ज़ख़्म
खाते
खाते
छोड़ा
साथ
दम
ने
माज़रत
इश्क़
करने
की
ख़ता
कर
ली
थी
हमने
माज़रत
सर
पटक
कर
चीख़ता
है
दर्द
मेरा
हर
घड़ी
देख
मुझको
कह
दिया
है
ख़ुद
ही
ग़म
ने
माज़रत
- Firdous khan
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सोचा
समझा
इश्क़
नहीं
करते
हैं
हम
नादानों
से
नादानी
हो
जाती
है
Upendra Bajpai
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ये
यक़ीं
है
की
मेरी
उल्फ़त
का
होगा
उन
पर
असर
कभी
न
कभी
Anwar Taban
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इश्क़
जब
तक
न
कर
चुके
रुस्वा
आदमी
काम
का
नहीं
होता
Jigar Moradabadi
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हाए
रे
मजबूरियाँ,
महरूमियाँ,
नाकामियाँ
इश्क़
आख़िर
इश्क़
है,
तुम
क्या
करो,
हम
क्या
करें
Jigar Moradabadi
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तुम्हारी
इक
झलक
से
रंग
उल्फत
के
उड़ाए
हैं
नज़ारों
की
नज़ाकत
को
ज़रा
देखो
मेरी
जानाँ
Aniket sagar
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तेरे
वादे
से
प्यार
है
लेकिन
अपनी
उम्मीद
से
नफ़रत
है
पहली
ग़लती
तो
इश्क़
करना
थी
शा'इरी
दूसरी
हिमाक़त
है
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Mehshar Afridi
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इश्क़
अगर
बढ़ता
है
तो
फिर
झगड़े
भी
तो
बढ़ते
हैं
आमदनी
जब
बढ़ती
है
तो
ख़र्चे
भी
तो
बढ़ते
हैं
माना
मंज़िल
नहीं
मिली
है
हमको
लेकिन
रोज़ाना
एक
क़दम
उसकी
जानिब
हम
आगे
भी
तो
बढ़ते
हैं
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Tanoj Dadhich
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तू
जो
हर
रोज़
नए
हुस्न
पे
मर
जाता
है
तू
बताएगा
मुझे
इश्क़
है
क्या
जाने
दे
Ali Zaryoun
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इश्क़
का
ज़ौक़-ए-नज़ारा
मुफ़्त
में
बदनाम
है
हुस्न
ख़ुद
बे-ताब
है
जल्वा
दिखाने
के
लिए
Asrar Ul Haq Majaz
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कुछ
न
मैं
समझा
जुनून
ओ
इश्क़
में
देर
नासेह
मुझ
को
समझाता
रहा
Meer Taqi Meer
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बदन
पर
नाम
हम
दोनों
का
पढ़कर
शजर
रो-रो
हरा
होता
रहेगा
Firdous khan
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तुम्हारा
फ़ोन
ख़ुद
काटूँ
तो
ये
महसूस
होता
है
कि
जैसे
आख़िरी
साँसों
को
गिनते
ख़ुद-कुशी
कर
ली
Firdous khan
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कहा
था
ये
उसने
है
दलदल
उदासी
उसी
से
मिली
फिर
मुसलसल
उदासी
मोहब्बत
की
खुशियाँ
है
उसके
हवाले
मेरे
हिस्से
आई
मुक़म्मल
उदासी
तब्बसुम
मेरे
लब
पे
सिसकी
है
मेरी
मेरी
उजड़ी
आँखों
का
काजल
उदासी
किया
इश्क़
तो
फिर
कफ़ारा
नहीं
कुछ
मोहब्बत
के
मारो
का
है
हल
उदासी
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Firdous khan
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लाश
बिस्तर
से
देखती
है
उसे
रूह
लटकी
हुई
है
पंखे
पर
Firdous khan
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साॅरी
उसने
मुझे
कहा
है
फिर
यानी
अब
कुछ
तो
हादसा
है
फिर
जिसके
जीने
का
कुछ
इलाज
नहीं
उसको
तो
मौत
ही
दवा
है
फिर
है
तमाशा
ये
ज़िन्दगी
मेरी
तेरा
होना
भी
शो'बदा
है
फिर
वस्ल
का
चश्मदीद
है
तन्हा
ख़ुद-ब-ख़ुद
दीप
जल
गया
है
फिर
कोई
आदम
का
नाम
साथ
नहीं
जी
मेरी
ज़ात
ख़ामख़ा
है
फिर
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Firdous khan
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