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Firdous khan
sab phool kyuuñ udaas the ye kya pata tumhein
sab phool kyuuñ udaas the ye kya pata tumhein | सब फूल क्यूँ उदास थे ये क्या पता तुम्हें
- Firdous khan
सब
फूल
क्यूँ
उदास
थे
ये
क्या
पता
तुम्हें
क़िस्मत
तो
है
गुलाब
की
उसने
छुआ
तुम्हें
- Firdous khan
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गुलाब
चाँदनी-रातों
पे
वार
आए
हम
तुम्हारे
होंटों
का
सदक़ा
उतार
आए
हम
Azhar Iqbal
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तुम्हें
ये
दुनिया
कभी
फूल
तो
नहीं
देगी
मिले
हैं
काँटे
तो
काँटों
को
ही
गुलाब
करो
Madan Mohan Danish
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गुल-दान
में
गुलाब
की
कलियाँ
महक
उठीं
कुर्सी
ने
उस
को
देख
के
आग़ोश
वा
किया
Mohammad Alvi
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सुनो
कि
अब
हम
गुलाब
देंगे
गुलाब
लेंगे
मोहब्बतों
में
कोई
ख़सारा
नहीं
चलेगा
Jawayd Anwar
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वो
क़हर
था
कि
रात
का
पत्थर
पिघल
पड़ा
क्या
आतिशीं
गुलाब
खिला
आसमान
पर
Zafar Iqbal
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किए
कराए
का
सारा
हिसाब
दूँगा
मैं
सवाल
जो
भी
करोगे
जवाब
दूँगा
मैं
ये
रख-रखाव
कभी
ख़त्म
होने
वाला
नहीं
बिछड़ते
वक़्त
भी
तुझको
गुलाब
दूँगा
मैं
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Khurram Afaq
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मेरे
हाथों
में
कुछ
गुलाब
तो
हैं
जो
न
मुमकिन
रहे
वो
ख़्वाब
तो
हैं
Shaista mufti
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गुलाब
टहनी
से
टूटा
ज़मीन
पर
न
गिरा
करिश्में
तेज़
हवा
के
समझ
से
बाहर
हैं
Shahryar
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दिल
का
गुलाब
मैं
ने
जिसे
चूम
कर
दिया
उस
ने
मुझे
बहार
से
महरूम
कर
दिया
Anjum Barabankvi
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जली
हैं
धूप
में
शक्लें
जो
माहताब
की
थीं
खिंची
हैं
काँटों
पे
जो
पत्तियाँ
गुलाब
की
थीं
Dagh Dehlvi
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कितना
मुश्किल
है
ना
हर
साल
सफ़र
पर
होना
संग-ए-मील
आख़िरी
बन
जाना
दिसम्बर
होना
Firdous khan
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हँसते
हुए
वो
मुझ
सेे
जुदा
कैसे
हो
गया
नुक़सान
में
किसी
का
नफ़ा
कैसे
हो
गया
ख़ुश
क़िस्मती
पे
अपनी
मुझे
शक
सा
होता
था
इतना
हसीन
शख़्स
मेरा
कैसे
हो
गया
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Firdous khan
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तुम्हारे
क़दमों
को
जब
चूमती
हूँ
लगता
है
ऐसा
कोई
जोगन
किसी
दरगाह
की
चौखट
को
चू
में
है
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Firdous khan
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बदन
पर
नाम
हम
दोनों
का
पढ़कर
शजर
रो-रो
हरा
होता
रहेगा
Firdous khan
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कहा
था
ये
उसने
है
दलदल
उदासी
उसी
से
मिली
फिर
मुसलसल
उदासी
मोहब्बत
की
खुशियाँ
है
उसके
हवाले
मेरे
हिस्से
आई
मुक़म्मल
उदासी
तब्बसुम
मेरे
लब
पे
सिसकी
है
मेरी
मेरी
उजड़ी
आँखों
का
काजल
उदासी
किया
इश्क़
तो
फिर
कफ़ारा
नहीं
कुछ
मोहब्बत
के
मारो
का
है
हल
उदासी
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Firdous khan
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