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Famyas Siwani
main tadap kar rah gaya tha vasl ka din dekhne ko
main tadap kar rah gaya tha vasl ka din dekhne ko | मैं तड़प कर रह गया था वस्ल का दिन देखने को
- Famyas Siwani
मैं
तड़प
कर
रह
गया
था
वस्ल
का
दिन
देखने
को
दूर
सहरा
में
किसी
ने
हिज्र
दे
कर
ज़िन्दगी
ली
- Famyas Siwani
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मैं
न
कहता
था
हिज्र
कुछ
भी
नहीं
ख़ुद
को
हलकान
कर
रही
थी
तुम
कितने
आराम
से
हैं
हम
दोनों
देखा
बेकार
डर
रही
थी
तुम
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Mehshar Afridi
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'मुनीर'
अच्छा
नहीं
लगता
ये
तेरा
किसी
के
हिज्र
में
बीमार
होना
Muneer Niyazi
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शब-ए-विसाल
बहुत
कम
है
आसमाँ
से
कहो
कि
जोड़
दे
कोई
टुकड़ा
शब-ए-जुदाई
का
Ameer Minai
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सर-ज़मीन-ए-हिंद
पर
अक़्वाम-ए-आलम
के
'फ़िराक़'
क़ाफ़िले
बसते
गए
हिन्दोस्ताँ
बनता
गया
Firaq Gorakhpuri
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इस
से
पहले
कि
ज़मीं-ज़ाद
शरारत
कर
जाएँ
हम
सितारों
ने
ये
सोचा
है
कि
हिजरत
कर
जाएँ
दौलत-ए-ख़्वाब
हमारे
जो
किसी
काम
न
आई
अब
किसी
को
नहीं
मिलने
की
वसिय्यत
कर
जाएँ
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Idris Babar
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नाप
रहा
था
एक
उदासी
की
गहराई
हाथ
पकड़कर
वापस
लायी
है
तन्हाई
वस्ल
दिनों
को
काफ़ी
छोटा
कर
देता
है
हिज्र
बढ़ा
देता
है
रातों
की
लम्बाई
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Tanoj Dadhich
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उसी
की
आस
ने
सँभाल
रक्खा
हिज्र
में
मुझे
वही
जो
अपनी
ज़ुल्फ़ें
तक
नहीं
सँवार
पाती
है
Harsh saxena
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शाम
थी
हिज्र
की
हाल
मत
पूछना
आँख
थकने
लगे
तो
जिगर
रो
पड़े
Piyush Mishra 'Aab'
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वो
शादी
तो
करेगी
मगर
एक
शर्त
पर
हम
हिज्र
में
रहेंगे
अगर
नौकरी
नहीं
Harsh saxena
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कैसी
बिपता
पाल
रखी
है
क़ुर्बत
की
और
दूरी
की
ख़ुशबू
मार
रही
है
मुझ
को
अपनी
ही
कस्तूरी
की
Naeem Sarmad
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तू
मेरे
अश्क
जितने
ही
बहाएगा
तिरा
भी
वक़्त
फिर
नज़दीक
आएगा
जलाया
इश्क़
में
कुछ
इस
क़दर
मुझको
ग़म-ए-दिल
तुझको
भी
हर-पल
जलाएगा
ख़ुदा
भी
देखता
ज़ुल्म-ओ-सितम
का
खेल
सितमगर
दिन
तिरा
भी
यूँँ
ही
आएगा
किसी
से
यूँँ
मुहब्बत
अब
नहीं
होगी
मुहब्बत
गर
हुई
वो
फिर
सताएगा
दिल-ओ-जाँ
लूट
कर
बे-घर
किया
तूने
तिरा
घर
भी
यूँँ
ही
कोई
लुटाएगा
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Famyas Siwani
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तू
अब
इतना
लुभाती
क्यूँँ
है
मेरी
जान
को
जानाँ
बता
अब
यूँँ
सताती
क्यूँँ
है
मेरी
जान
को
जानाँ
Famyas Siwani
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गर
मुलाक़ात
हो
रब
से
मेरी
तो
पूछूँगा
दर-हक़ीक़त
वो
जुदाई
का
सबब
और
क्या
था
Famyas Siwani
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मैं
न
तन्हा
था
न
थी
दिल
में
मेरे
कोई
मुहब्बत
अब
मुहब्बत
है
मुझे
पर
क़ैद
में
उसके
ये
दिल
है
Famyas Siwani
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अब
न
डालो
ख़ाक
मेरी
कब्र
पर
इश्क़
की
ये
बंदिशें
अब
ख़त्म
हैं
Famyas Siwani
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