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Shadab Asghar
kuchh to uski behisi se mar ga.e
kuchh to uski behisi se mar ga.e | कुछ तो उसकी बेहिसी से मर गए
- Shadab Asghar
कुछ
तो
उसकी
बेहिसी
से
मर
गए
और
कुछ
सादा
दिली
से
मर
गए
कुछ
तो
उसने
लौट
कर
देखा
नहीं
जो
बचे
थे
मयकशी
से
मर
गए
हम
ने
उसको
देर
तक
देखा
किया
और
उस
की
सादगी
से
मर
गए
दिल
में
अरमां
और
लब
पर
कुछ
नहीं
हम
तो
ख़ुद
की
बुज़दिली
से
मर
गए
अब
फ़क़त
सांसे
बची
है
दोस्तों
हम
तो
कब
का
ज़िन्दगी
से
मर
गए
- Shadab Asghar
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मुझे
इक
बात
कहनी
थी
अगर
मुझ
को
इज़ाज़त
हो
तुम्हीं
मेरी
मुहब्बत
हो
मुहब्बत
हो
मुहब्बत
हो
Shadab Asghar
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राधा
नईं
तो
श्याम
नहीं
है
कोई
यहाँ
पे
राम
नहीं
है
उन
सेे
दु'आ
सलाम
नहीं
है
जिनसे
कोई
काम
नहीं
है
ऐसा
जीना
भी
क्या
जीना
इक
पल
भी
आराम
नहीं
है
लोगों
की
बातों
का
क्या
है
उनको
कोई
काम
नहीं
है
उसके
हाथों
पर
मेहंदी
है
लेकिन
मेरा
नाम
नहीं
है
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Shadab Asghar
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तुझे
भुला
भी
दिया
फिर
भी
तेरे
पास
रहा
परिन्दे
उड़
गए
लेकिन
कफ़स
उदास
रहा
Shadab Asghar
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चाहे
जीतनी
भले
ही
देरी
हो
इक़
दु'आ
है
कभी
तो
पूरी
हो
काश
हम
तुम
से
हक़
से
कह
पाते
जान
ए
जॉ
तुम
तो
सिर्फ़
मेरी
हो
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Shadab Asghar
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कलेंडर,
दिन
,महीने
साल
बदले
और
इक
मैं
हूँ
मुझे
कल
भी
मुहब्बत
थी,
मुझे
अब
भी
मुहब्बत
है
Shadab Asghar
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