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Dileep Kumar
darmiyaañ jab kisi ko gawara kiya
darmiyaañ jab kisi ko gawara kiya | दरमियाँ जब किसी को गवारा किया
- Dileep Kumar
दरमियाँ
जब
किसी
को
गवारा
किया
हमने
हर
एक
से
फिर
किनारा
किया
हमने
तो
सोची
थी
ज़िंदगी
साथ
में
पर
किसी
और
से
ही
गुज़ारा
किया
- Dileep Kumar
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मुझे
ख़बर
नहीं
ग़म
क्या
है
और
ख़ुशी
क्या
है
ये
ज़िंदगी
की
है
सूरत
तो
ज़िंदगी
क्या
है
Ahsan Marahravi
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न
लौटोगे
कभी
तुम
जानता
हूँ
ये
मेरी
ज़िंदगी
है
फ़िल्म
थोड़ी
SWAPNIL YADAV 'NIL'
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आस्था
का
रंग
आ
जाए
अगर
माहौल
में
एक
राखी
ज़िंदगी
का
रुख़
बदल
सकती
है
आज
Unknown
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ये
मेरी
ज़िद
ही
ग़लत
थी
कि
तुझ
सेा
बन
जाऊँ
मैं
अब
न
अपनी
तरह
हूँ
न
तेरे
जैसा
हूँ
हमारे
बीच
ज़माने
की
बदगुमानी
है
मैं
ज़िंदगी
से
ज़रा
कम
ही
बात
करता
हूँ
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Subhan Asad
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एक
ही
नदी
के
हैं
ये
दो
किनारे
दोस्तो
दोस्ताना
ज़िंदगी
से
मौत
से
यारी
रखो
Rahat Indori
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तुम
भी
साबित
हुए
कमज़ोर
मुनव्वर
राना
ज़िन्दगी
माँगी
भी
तुमने
तो
दवा
से
माँगी
Munawwar Rana
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ज़िन्दगी
से
ऐसे
काटा
सीन
उसने
इश्क़
का
देखता
है
कोई
जैसे
फ़िल्म
गाने
काट
कर
Ankit Maurya
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मुझे
फुर्सत
नहीं
अब
वाक़ई
में
बहुत
मसरूफ
हूँ
मैं
ज़िन्दगी
में
Reshma Shaikh
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दर्द
ऐसा
है
कि
जी
चाहे
है
ज़िंदा
रहिए
ज़िंदगी
ऐसी
कि
मर
जाने
को
जी
चाहे
है
Kaleem Aajiz
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बहुत
हसीन
सही
सोहबतें
गुलों
की
मगर
वो
ज़िंदगी
है
जो
काँटों
के
दरमियाँ
गुज़रे
Jigar Moradabadi
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एक
तो
दिल
बहुत
दुखा
मेरा
और
वो
भी
नहीं
हुआ
मेरा
टूटते,
रोते
देख
के
उसको
चेहरा
ही
फीका
पड़
गया
मेरा
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Dileep Kumar
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हुस्न
के
चक्कर
से
बाहर
आ
गए
अब
तो
हम
दोनों
बराबर
आ
गए
ये
उदासी
ये
थकन
मिट
जाएगी
हम
सफ़र
से
लौट
के
घर
आ
गए
मेरे
हिस्से
एक
क़तरा
भी
नहीं
उसके
हिस्से
में
समुंदर
आ
गए
इश्क़
के
पर्चे
में
उसके
नाम
से
मेरे
अच्छे
ख़ासे
नंबर
आ
गए
ज़िंदा
थे
तो
तैरना
आया
नहीं
मर
गए
तो
झट
से
ऊपर
आ
गए
आप
वापस
लौटने
वाले
थे
ना
आप
कैसे
दिल
के
अंदर
आ
गए
याद
रहता
ही
नहीं
कुछ
आजकल
छुट्टी
के
दिन
पे
भी
दफ़्तर
आ
गए
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Dileep Kumar
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ज़ेहन
में
पिंदार
ही
पिंदार
है
पर
अकेले
चलना
भी
दुश्वार
है
और
कोई
मसअला
भी
अब
नहीं
दरमियाँ
बस
एक
ही
दीवार
है
चाय
क्या
पीते
ख़बर
क्या
पढ़ते
हम
ख़ून
से
लथपथ
जो
ये
अख़बार
है
जीत
से
पहले
अलग
हैं,
बाद
में
नेता
लोगों
के
अलग
किरदार
है
हम
करें
शिकवा
भी
तो
किस
से
करें
जब
हमारे
दोस्त
ही
दो-चार
है
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Dileep Kumar
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हमारे
दरमियाँ
जो
दूरियाँ
हैं
यक़ीनन
तीसरा
कोई
वजह
है
Dileep Kumar
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मोहब्बत
भले
ही
ज़ियादा
नहीं
है
बिछड़ने
का
कोई
इरादा
नहीं
है
Dileep Kumar
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