ranj sabko hi koi bhi saath men kab tha dharm | रंज सबको ही कोई भी साथ में कब था धरम

  - "Dharam" Barot
रंजसबकोहीकोईभीसाथमेंकबथाधरम
जाननायेअच्छेसेथासाथमेंरबथाधरम
इतनेअच्छेलोगसतयुगमेंनहींहोंगेकभी
जोकहेंगेकामसेहीतुझसेेमतलबथाधरम
सालपूरेबीसगुज़रेराहमेंतेरेहीहै
सुननेकोयेपासमेंकोईमेरेकबथाधरम
ज़िंदगीमेंमेरीख़ुशहूँऔरयेदिखताभीहै
हाँमगरकहनाग़लतहैपासमेंसबथाधरम
उसकीमर्ज़ीबिननहींहिलताहैपत्ताभीयहाँ
औरतूयेकहताहैतेरायेकरतबथाधरम
  - "Dharam" Barot
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