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"Dharam" Barot
jal rahe hai log hairat ho rahi hai
jal rahe hai log hairat ho rahi hai | जल रहे है लोग हैरत हो रही है
- "Dharam" Barot
जल
रहे
है
लोग
हैरत
हो
रही
है
आप
की
इस
में
भी
बरकत
हो
रही
है
आपने
ताला
लगाया
अपने
मुँह
पर
मेरी
लिखने
की
तो
हिम्मत
हो
रही
है
आपको
देखा
है
जब
से
दिल
में
मेरे
हद
से
ज़्यादा
इस
में
हरकत
हो
रही
है
झूठ
को
सच
मानने
का
फ़ायदा
ये
ज़िंदगी
दोनों
की
जन्नत
हो
रही
है
चाह
थी
जिसकी
बनी
है
वो
हक़ीक़त
ऐसे
पूरी
मेरी
मन्नत
हो
रही
है
- "Dharam" Barot
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तेरी
ख़ातिर
ख़ुदास
हम
दु'आ
करते
नहीं
करते
भला
हम
और
क्या
करते
Arohi Tripathi
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है
दु'आ
जल्दी
जन्नत
अता
हो
तुझे
तू
मेरे
इश्क़
का
इश्क़
है
ऐ
रक़ीब
Prit
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तुझ
से
सौ
बार
मिल
चुके
लेकिन
तुझ
से
मिलने
की
आरज़ू
है
वही
Jaleel Manikpuri
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वही
मंज़िलें
वही
दश्त
ओ
दर
तिरे
दिल-ज़दों
के
हैं
राहबर
वही
आरज़ू
वही
जुस्तुजू
वही
राह-ए-पुर-ख़तर-ए-जुनूँ
Noon Meem Rashid
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न
जी
भर
के
देखा
न
कुछ
बात
की
बड़ी
आरज़ू
थी
मुलाक़ात
की
Bashir Badr
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कौन
देकर
गया
दु'आ
दिल
को
उम्र
भर
दर्द
ही
रहा
दिल
को
दस्तकें
दे
रहा
है
कुछ
दिन
से
हम
सेे
क्या
काम
पड़
गया
दिल
को
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Subhan Asad
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अभी
ज़िंदा
है
माँ
मेरी
मुझे
कुछ
भी
नहीं
होगा
मैं
घर
से
जब
निकलता
हूँ
दु'आ
भी
साथ
चलती
है
Munawwar Rana
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तेरे
होंठो
से
गर
इक
काम
लेना
हो
तेरे
होंठो
से
हम
बस
इक
दु'आ
लेंगे
Siddharth Saaz
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ख़मोशी
मेरी
मअनी-ख़ेज़
थी
ऐ
आरज़ू
कितनी
कि
जिस
ने
जैसा
चाहा
वैसा
अफ़्साना
बना
डाला
Arzoo Lakhnavi
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अश्कों
को
आरज़ू-ए-रिहाई
है
रोइए
आँखों
की
अब
इसी
में
भलाई
है
रोइए
Abbas Qamar
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हारकर
हँसना
हुनर
है
खेल
का
जंग
में
बाज़ी
लगी
थी
जान
की
"Dharam" Barot
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सभी
रूठते
जब
निभाता
मेरा
साथ
ज़मींदोज़
होता
नहीं
दोस्त
सच्चा
"Dharam" Barot
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पता
क्या
है
पता
होता
था
मुझको
उसे
क्यूँ
ढूँढ़ना
होता
था
मुझको
कभी
चुप
बैठना
होता
था
मुझको
कभी
कुछ
बोलना
होता
था
मुझको
मुझे
बस
ज़िंदगी
में
चाहिए
वो
उसे
बस
छोड़ना
होता
था
मुझको
कभी
हद
पार
कर
ने
में
मज़ा
था
अभी
बस
रोकना
होता
था
मुझको
ख़ुशी
कम
या
ज़ियादा
बाँट
दी
थी
ग़मों
को
रोकना
होता
था
मुझको
बनाकर
सब
को
ही
अपना
रखा
था
सभी
से
खेलना
होता
था
मुझको
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आँखें
नम
हो
तो
अच्छा
रहता
सूखी
आँखों
में
ख़तरा
रहता
टूटे
दिल
में
रहता
थोड़ी
वो
उसका
बस
आना
जाना
रहता
इस
सेे
ज़्यादा
क्या
ही
हो
जाना
इंसाँ
पानी
का
प्यासा
रहता
पहली
सीढ़ी
इश्क़
की
ये
होती
मेरा
सारे
के
सारा
रहता
हिम्मत
मीरा
जैसी
लानी
थी
मेरे
दिल
में
बस
कान्हा
रहता
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"Dharam" Barot
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मर्ज़ी
बिन
उसकी
पत्ता
भी
नहीं
हिलता
अपना
माना
कैसे
अपनी
मर्ज़ी
से
"Dharam" Barot
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