bol ke kalyug hai satyug ko bhagaaya tha kisi ne | बोल के कलयुग है सतयुग को भगाया था किसी ने

  - "Dharam" Barot
बोलकेकलयुगहैसतयुगकोभगायाथाकिसीने
धीरेसेऐसेबुराईकोजगायाथाकिसीने
कोईऐसेहीअकेलाहोनहींजाताकभीभी
एकबारीभीगलेदिलसेलगायाथाकिसीने
मेरीराहेंतेरेतकहैतुझपेहीतोमेराहक़है
वास्तेमेरेयेगानादिलसेगायाथाकिसीने
जोकहानीहैसुनाईएकतकरुकनीनहींथी
प्रेमकाप्रस्तावमेराभीफगायाथाकिसीने
ठोकरेंदेकर'धरम'कोठोसकरनेकोनमनहै
ज़िंदगीकादीपऐसेजगमगायाथाकिसीने
  - "Dharam" Barot
Share

profile-whatsappprofile-twitterprofile-fbprofile-copy