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DEVANSH TIWARI
she'r padhte hue dekhta hooñ
she'r padhte hue dekhta hooñ | शे'र पढ़ते हुए देखता हूँ
- DEVANSH TIWARI
शे'र
पढ़ते
हुए
देखता
हूँ
कौन
किसकी
तरफ़
देखता
है
- DEVANSH TIWARI
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जिसने
झेला
हिज्र
वही
बस
जाने
सच
में
कितना
इश्क़
बुरा
होता
है
DEVANSH TIWARI
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ऐसा
लगता
है
कि
संसार
चला
जाएगा
जाने
वाला
अगर
उस
पार
चला
जाएगा
पहले
कहना
कि
घड़ी
भर
के
लिए
रुक
जाए
फिर
समझना
कि
वफ़ादार
चला
जाएगा
जाने
वालों
को
यूँँ
वापिस
न
बुलाओ
यारों
जिसको
जाना
है
वो
हर
बार
चला
जाएगा
उन
सेे
मिलना
तो
ज़रूरी
है
इसी
पल
मेरा
नहीं
तो
जाँ
से
दिल-ए-ज़ार
चला
जाएगा
हर्फ़-ए-आख़िर
में
यही
बात
अभी
कहनी
है
इश्क़
ये
करके
तलबगार
चला
जाएगा
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DEVANSH TIWARI
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अंधों
की
बेचैनी
को
तुम
क्या
जानो
दुनियावालों
तुमने
तो
दोनों
आँखों
से
ख़ूब
उजाले
देखे
हैं
DEVANSH TIWARI
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रास्ता
हो
या
कोई
दीवार
साईं
दोस्त
हों
तो
हो
ही
जाते
पार
साईं
ज़िंदगी
से
इसलिए
ही
लड़
रहा
हूँ
ज़िंदगी
से
करता
हूँ
मैं
प्यार
साईं
आदमी
तो
आदमी
है
इश्क़
खोकर
राम
जी
भी
हो
गए
बेज़ार
साईं
बचपने
में
ख़्वाब
होते
थे
बड़े
सब
अब
हमारा
ख़्वाब
है
इतवार
साईं
बीच
में
घर-बार
है
उस
पार
है
वो
भेज
दे
महबूब
को
इस
पार
साईं
अब
नहीं
दिखते
शजर
उन
खिड़कियों
से
खुल
गया
है
अब
वहाँ
बाज़ार
साईं
रात
दिन
की
ये
कुढ़न
उफ़
हाए
रब्बा
अब
नहीं
जँचता
मुझे
संसार
साईं
इश्क़
का
मतलब
फ़क़त
अब
जिस्म
से
है
घट
रहा
है
इश्क़
का
मेयार
साईं
चाहता
'देवांश'
भी
है
ख़ूब
हँसना
कर
रहा
है
दिल
मगर
इनकार
साईं
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DEVANSH TIWARI
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जिस
लड़की
की
ख़ातिर
मैं
पागल
हो
बैठा
वो
लड़की
भी
अब
मुझको
पागल
कहती
है
DEVANSH TIWARI
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