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Chetan
saansen badhti thii paas aate hi
saansen badhti thii paas aate hi | साँसें बढ़ती थी पास आते ही
- Chetan
साँसें
बढ़ती
थी
पास
आते
ही
तेरी
फ़ुर्क़त
में
मरना
वाजिब
है
- Chetan
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तुझ
सेे
तब
ऊब
जाना
अच्छा
था
अब
तो
वो
दौर
भी
गया
समझो
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तुम्हारे
बिन
करेंगे
क्या
जो
कहते
थे
हमें
छोड़ा
तो
अब
क्या
क्या
नहीं
करते
Chetan
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क्या
हुआ
गर
ये
रंग
पक्का
है
तुझ
सेे
हर
रंग
जल्दी
उतरा
है
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उसने
वा'दा
किया
था
आने
का
था
मगर
वो
भी
इस
ज़माने
का
शुक्र
है
घर
कोई
नहीं
आया
जब
ठिकाना
नहीं
था
खाने
का
क्यूँँ
ख़ुशी
हो
अगर
मिलें
अब
हम
ज़ख़्म
गहरा
है
दूर
जाने
का
क्या
तुझे
चाहता
है
अब
कोई
या
पता
मिल
गया
ख़ज़ाने
का
अब
मुक़ाबिल
नहीं
हैं
हम
दोनों
ये
है
पल
राब्ता
निभाने
का
वो
सहारा
नहीं
रहा
मेरा
सो
बहाना
है
डगमगाने
का
तेज़
बारिश
में
बाम-ओ-दर
को
क्यूँँ
हक़
नहीं
होता
थरथराने
का
मुझको
रातें
जगा
रही
हैं
तो
दिन
को
क्यूँँ
हक़
नहीं
सुलाने
का
नाम
पर
उसके
ये
कहानी
थी
इंतिहा
क्या
लिखें
फ़साने
का
देता
दस्तक
तो
खुल
गया
होता
घर
उसी
से
था
आस्ताने
का
इक
वजह
था
वो
गुनगुनाने
की
इक
बहाना
था
मुस्कुराने
का
आ
गया
हूँ
उड़ान
भरने
मैं
हौसला
मुझ
में
लड़खड़ाने
का
कैसे
कोई
करे
रिहा
उसको
जो
सिपाही
हो
क़ैद
ख़ाने
का
हर
घड़ी
नाम
साथ
'गर
रहता
होता
कोठा
भी
घर
घराने
का
कौन
हसरत
तेरी
करे
चेतन
शौक़
सब
कुछ
तुझे
गँवाने
का
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ज़िंदगी
तेरे
दस्तरस
में
थी
अब
तो
बिस्तर
पकड़
लिया
हमने
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