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Bhoomi Srivastava
vo ghaav jigar ke ab tak ja na sake hain aur
vo ghaav jigar ke ab tak ja na sake hain aur | वो घाव जिगर के अब तक जा न सके हैं और
- Bhoomi Srivastava
वो
घाव
जिगर
के
अब
तक
जा
न
सके
हैं
और
फिर
इश्क़
हो
जाए
ये
आसान
नहीं
इतना
- Bhoomi Srivastava
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मुहब्बत
में
हमने
सियासत
न
की
तभी
इश्क़
में
कोई
बरकत
न
की
उसे
मानता
था
मैं
अपना
ख़ुदा
कभी
उसकी
लेकिन
इबादत
न
की
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RAJAT AWASTHI
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तू
मोहब्बत
नहीं
समझती
है
हम
भी
अपनी
अना
में
जलते
हैं
इस
दफा
बंदिशें
ज़ियादा
हैं
छोड़
अगले
जनम
में
मिलते
हैं
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Ritesh Rajwada
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जनाज़े
पर
मेरे
लिख
देना
यारों
मोहब्बत
करने
वाला
जा
रहा
है
Rahat Indori
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सुने
हैं
मोहब्बत
के
चर्चे
बहुत
सुना
है
कि
हैं
इस
में
ख़र्चे
बहुत
नतीजे
मोहब्बत
के
आए
नहीं
भरे
थे
मगर
हम
ने
पर्चे
बहुत
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S M Afzal Imam
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अदाकार
के
कुछ
भी
बस
का
नहीं
है
मोहब्बत
है
ये
कोई
ड्रामा
नहीं
है
जिसे
तेरी
आँखें
बताती
हैं
रस्ता
वो
राही
कहीं
भी
पहुँचता
नहीं
है
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Zubair Ali Tabish
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रास्ता
जब
इश्क़
का
मौजूद
है
फिर
किसी
की
क्यूँँ
इबादत
कीजिए?
ख़ुद-कुशी
करना
बहुत
आसान
है
कुछ
बड़ा
करने
की
हिम्मत
कीजिए
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Bhaskar Shukla
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बाद
में
तुम
से
इश्क़
कर
लेंगे
पहले
ख़ुदस
तो
प्यार
कर
लें
हम
Shadab Asghar
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नींद
के
दायरे
में
हाज़िर
हूँ
ख़्वाब
के
रास्ते
में
हाज़िर
हूँ
याद
है
इश्क़
था
कभी
मुझ
सेे
मैं
उसी
सिलसिले
में
हाज़िर
हूँ
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Ejaz Tawakkal Khan
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शहर-वालों
की
मोहब्बत
का
मैं
क़ायल
हूँ
मगर
मैंने
जिस
हाथ
को
चूमा
वही
ख़ंजर
निकला
Ahmad Faraz
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रोज़
मिलने
पे
भी
लगता
था
कि
जुग
बीत
गए
इश्क़
में
वक़्त
का
एहसास
नहीं
रहता
है
Ahmad Mushtaq
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पहले
की
तस्वीरें
मेरी
अच्छी
हैं
पहले
तुम
से
मेरी
बातें
होती
थी
Bhoomi Srivastava
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जो
इतनी
ख़ूब-सूरत
लग
रही
हो
तुम
किसी
पत्थर
को
पिघला
के
ही
मानोगी
Bhoomi Srivastava
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मैं
क्यूँ
बोलूँ
कि
वो
इक
बे-वफ़ा
है
उसी
का
ज़ेहन
ख़ुद
बोलेगा
इक
दिन
Bhoomi Srivastava
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ये
दिल
इक
पत्थर
हो
सकता
है
इस
से
भी
बदतर
हो
सकता
है
उल्फ़त
के
जंगल
में
मत
फँसना
मजनूँ
भी
अजगर
हो
सकता
है
तुम
जौहर
जैसे
मैं
मुक्ता
सी
दोनों
में
अंतर
हो
सकता
है
दुनिया
नज़रों
पर
काम
करें
तो
किन्नर
भी
अफ़सर
हो
सकता
है
चिमटे
वाले
हाथों
में
कॉपी
ये
प्यारा
मंज़र
हो
सकता
है
गुलशन
को
देखूँ
तो
लगता
है
ये
तुझ
सा
सुंदर
हो
सकता
है
जो
ग़म
पी
रक्खा
मय-ख़ाने
में
ऐसे
भी
बाहर
हो
सकता
है
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Bhoomi Srivastava
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ये
माँ
की
बोलियाँ
ही
जानती
हैं
सुलाना
लोरियाँ
ही
जानती
हैं
क़फ़स
में
क़ैद
पंछी
के
दुखों
को
फ़क़त
हम
लड़कियाँ
ही
जानती
हैं
मुहब्बत
कौन
किस
सेे
कर
रहा
है
ये
बातें
चिट्ठियाँ
ही
जानती
हैं
हक़ीक़त
तो
तवायफ़
के
जहाँ
की
अकेले
कोठियाँ
ही
जानती
हैं
घरों
के
टूटने
का
ग़म
तो
यारों
यहाँ
मधुमक्खियाँ
ही
जानती
हैं
सही
हैं
ज़िल्लतें
जितनी
भी
मैंने
उसे
ख़ामोशियाँ
ही
जानती
हैं
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Bhoomi Srivastava
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