परिंदेउड़रहेहैंदेखपाताहूँ
मगरमजबूरहूँपिंजरेबनाताहूँ
वहीमतलबभराइककामदोबारा
चलोआगेतुम्हारेपीछेआताहूँ
कहेगीज़िन्दगीभीएकदिनमुझसेे
मैंग़फ़लतमेंबहुतचीज़ेंभुलाताहूँ
वोमुझसेेप्यारकरतीहैछुपातीहै
मैंउससेेप्यारकरताहूँजताताहूँ
अगर'आवर्त'उसदिनमरगयाथातू
किसेमैंअपनेपहलूमेंबिठाताहूँ