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Ashok Sagar
zindagi tu bhi mere saath safar karti hai
zindagi tu bhi mere saath safar karti hai | ज़िंदगी तू भी मेरे साथ सफ़र करती है
- Ashok Sagar
ज़िंदगी
तू
भी
मेरे
साथ
सफ़र
करती
है
देखना
यह
है
कि
कब
तक
के
मगर
करती
है
- Ashok Sagar
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आँख
भर
आई
किसी
से
जो
मुलाक़ात
हुई
ख़ुश्क
मौसम
था
मगर
टूट
के
बरसात
हुई
Manzar Bhopali
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मेरे
दर्द
की
वो
दवा
है
मगर
मेरा
उस
सेे
कोई
भी
रिश्ता
नहीं
मुसलसल
मिलाता
है
मुझ
सेे
नज़र
मैं
कैसे
कहूँ
वो
फ़रिश्ता
नहीं
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S M Afzal Imam
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कबूतर
इश्क़
का
उतरे
तो
कैसे?
तुम्हारी
छत
पे
निगरानी
बहुत
है
इरादा
कर
लिया
गर
ख़ुद-कुशी
का
तो
ख़ुद
की
आँख
का
पानी
बहुत
है
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Kumar Vishwas
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तिलिस्म-ए-यार
ये
पहलू
निकाल
लेता
है
कि
पत्थरों
से
भी
ख़ुशबू
निकाल
लेता
है
है
बे-लिहाज़
कुछ
ऐसा
की
आँख
लगते
ही
वो
सर
के
नीचे
से
बाजू
निकाल
लेता
है
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Tehzeeb Hafi
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अब
ज़रूरी
तो
नहीं
है
कि
वो
सब
कुछ
कह
दे
दिल
में
जो
कुछ
भी
हो
आँखों
से
नज़र
आता
है
मैं
उस
सेे
सिर्फ़
ये
कहता
हूँ
कि
घर
जाना
है
और
वो
मारने
मरने
पे
उतर
आता
है
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Tehzeeb Hafi
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कमाल
ये
है
मुझे
देखती
हैं
वो
आँखें
मलाल
ये
है
उन्हें
देखना
नहीं
आता
Dilawar Ali Aazar
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पुतलियाँ
तक
भी
तो
फिर
जाती
हैं
देखो
दम-ए-नज़अ
वक़्त
पड़ता
है
तो
सब
आँख
चुरा
जाते
हैं
Ameer Minai
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मुँह
ज़र्द-ओ-आह-ए-सर्द
ओ
लब-ए-ख़ुश्क
ओ
चश्म-ए-तर
सच्ची
जो
दिल-लगी
है
तो
क्या
क्या
गवाह
है
Nazeer Akbarabadi
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वो
जिस
ने
आँख
अता
की
है
देखने
के
लिए
उसी
को
छोड़
के
सब
कुछ
दिखाई
देता
है
Zubair Ali Tabish
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आँसू
हमारे
गिर
गए
उन
की
निगाह
से
इन
मोतियों
की
अब
कोई
क़ीमत
नहीं
रही
Jaleel Manikpuri
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जिस
तरह
पेश
आती
है
मुझ
सेे
इस
सेे
बेहतर
है
बे-वफ़ा
हो
जा
Ashok Sagar
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चराग़ों
के
बिना
सागर
बहुत
घर
हो
गए
होते
सुख़न
के
नाम
का
है
जो
अगर
मरहम
नहीं
होता
Ashok Sagar
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मैंने
अपना
लिया
ग़ज़ल
को
जब
शा'इरी
ने
मुझे
ही
छोड़
दिया
Ashok Sagar
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ख़फ़ा
किस
लिए
हैं
बताते
नहीं
हैं
नज़र
से
नज़र
भी
मिलाते
नहीं
हैं
ख़बर
उनकी
लाकर
मुझे
कोई
दे
दे
गली
में
मेरी
क्यूँ
वो
आते
नहीं
हैं
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Ashok Sagar
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वक़्त
के
साथ
पिलाया
है
इन्हें
अपना
लहू
तब
कहीं
जाके
उगी
है
ये
सुख़न
की
फसलें
Ashok Sagar
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