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Arohi Tripathi
uske maathe pe kisi hi aur ka sindoor hai
uske maathe pe kisi hi aur ka sindoor hai | उसके माथे पे किसी ही और का सिन्दूर है
- Arohi Tripathi
उसके
माथे
पे
किसी
ही
और
का
सिन्दूर
है
दिल
के
अंदर
है
मगर
लगता
हमेशा
दूर
है
एक
वादे
पे
गुज़र
जाती
हमारी
ज़िंदगी
जानता
हूँ
प्यार
में
वो
आज
भी
मजबूर
है
सच
यही
दुनिया
मोहब्बत
को
समझती
ही
नहीं
एक
होने
ही
नहीं
दे
इश्क़
में
दस्तूर
है
और
चाहत
भी
नहीं
है
और
ख़्वाहिश
भी
नहीं
एक
जन्नत
है
जहाँ
में
एक
मेरी
हूर
है
- Arohi Tripathi
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इश्क़
हमारा
चाँद
सितारे
छू
लेगा
घुटनों
पर
आकर
इज़हार
किया
हमने
Darpan
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दूजा
इश्क़
किया
तो
ये
मालूम
हुआ
पहले
वाले
में
भी
ग़लती
मेरी
थी
Tanoj Dadhich
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हाए
रे
मजबूरियाँ,
महरूमियाँ,
नाकामियाँ
इश्क़
आख़िर
इश्क़
है,
तुम
क्या
करो,
हम
क्या
करें
Jigar Moradabadi
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इश्क़
भी
अक़्ल
के
साथ
करते
हो
तुम
कैसी
बेकार
की
बात
करते
हो
तुम
Intzar Akhtar
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बिना
इस
इश्क़
के
कैसे
गुज़ारा
हो
ज़रूरी
है
कि
हो
ये
इश्क़
दोबारा
Abhay Aadiv
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तुम्हारी
इक
झलक
से
रंग
उल्फत
के
उड़ाए
हैं
नज़ारों
की
नज़ाकत
को
ज़रा
देखो
मेरी
जानाँ
Aniket sagar
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दिल
से
निकलेगी
न
मर
कर
भी
वतन
की
उल्फ़त
मेरी
मिट्टी
से
भी
ख़ुशबू-ए-वफ़ा
आएगी
Lal Chand Falak
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कब
तुम्हें
इश्क़
पे
मजबूर
किया
है
हमने
हम
तो
बस
याद
दिलाते
हैं
चले
जाते
हैं
Abbas Tabish
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इश्क़
जब
तक
न
कर
चुके
रुस्वा
आदमी
काम
का
नहीं
होता
Jigar Moradabadi
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ये
है
पहली
बात
तुझ
सेे
इश्क़
है
दूसरी
ये
बात,
पहली
बात
सुन
Siddharth Saaz
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दवाओं
से
नहीं
कुछ
होने
वाला
दु'आओं
से
हमें
हासिल
हुआ
सब
Arohi Tripathi
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शाम
से
ही
बरस
रहे
हो
तुम
चाँदनी
को
तरस
रहे
हो
तुम
और
कोई
नहीं
हमारे
साथ
यार
किसको
दरस
रहे
हो
तुम
मान
लेना
नहीं
रहूँगा
मैं
साँप
जैसे
कि
डस
रहे
हो
तुम
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Arohi Tripathi
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मुझे
ही
मैं
हराना
चाहती
हूँ
तुम्हें
दुखड़ा
सुनाना
चाहती
हूँ
भरी
महफ़िल
तुझे
बदनाम
करके
तिरा
चेहरा
दिखाना
चाहती
हूँ
पुराने
से
जो
बेहतर
सोचता
हो
नया
ऐसा
दिवाना
चाहती
हूँ
मिला
उम्दा
मगर
आला
नहीं
है
वही
फिर
अब
पुराना
चाहती
हूँ
बहुत
ढूँढा
मगर
फिर
भी
न
पाया
वही
हक़
था
बताना
चाहती
हूँ
हजारों
मिल
तो
जाएँगे
मगर
मैं
तुम्हारे
पास
आना
चाहती
हूँ
तुम्हारा
होना
ही
दिल
को
सुकूँ
है
ज़रा
अब
मुस्कुराना
चाहती
हूँ
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Arohi Tripathi
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ताज
से
सर
तिरा
सजाऊँगी
तू
जो
कह
दे
क़सम
से
लाऊँगी
मैं
ख़ुदास
दु'आ
ये
करती
हूँ
अपना
शौहर
तुम्हें
बनाऊँगी
तेरी
ख़्वाहिश
गले
लगाने
की
जान
इक
दिन
गले
लगाऊँगी
सब्र
करना
ज़रूर
होगा
ये
घर
की
रौनक़
तुम्हें
बनाऊँगी
यार
ग़ुस्सा
नहीं
किया
करते
प्यार
से
मैं
उसे
मनाऊँगी
बुत-परस्ती
हराम
है
जानी
है
ख़ुदा
कौन
ये
पढ़ाऊँगी
तू
न
समझे
तो
कौन
समझेगा
अब
ख़ुदा
को
ही
सब
बताऊँगी
तू
मुझे
भूलने
की
कोशिश
कर
याद
मैं
बार
बार
आऊँगी
काँच
जैसे
बिखर
गया
है
दिल
दिल
के
टुकड़े
तुम्हें
दिखाऊँगी
हार
कर
ख़ुद-कुशी
नहीं
करते
यार
जीना
तुम्हें
सिखाऊँगी
छोड़ती
हूँ
ख़ुदा
की
रहमत
पर
उसकी
रहमत
हुई
तो
पाऊँगी
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Arohi Tripathi
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जब
कभी
देखो
यही
वो
सोचता
है
मैं
नहीं
मिलने
गया
तो
सोचता
है
Arohi Tripathi
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