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Arohi Tripathi
ishq ka jab nizaam badlega
ishq ka jab nizaam badlega | इश्क़ का जब निज़ाम बदलेगा
- Arohi Tripathi
इश्क़
का
जब
निज़ाम
बदलेगा
रंग
उनका
तमाम
बदलेगा
हद
से
ज़्यादा
पसंद
आया
है
जानकर
अपना
दाम
बदलेगा
मौत
से
डर
गया
सफ़र
वाला
डर
के
मारे
क़याम
बदलेगा
जबसे
बदनाम
हो
गया
जानी
थी
ख़बर
हमको
नाम
बदलेगा
- Arohi Tripathi
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बे-फ़र्श-ओ-बाम
सिलसिला-ए-काएनात
के
इस
बे-सुतूँ
निज़ाम
में
तू
भी
है
मैं
भी
हूँ
बे-साल-ओ-सिन
ज़मानों
में
फैले
हुए
हैं
हम
बे-रंग-ओ-नस्ल
नाम
में
तू
भी
है
मैं
भी
हूँ
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Akbar Hyderabadi
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किसी
कली
किसी
गुल
में
किसी
चमन
में
नहीं
वो
रंग
है
ही
नहीं
जो
तिरे
बदन
में
नहीं
Farhat Ehsaas
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रंग-ओ-रस
की
हवस
और
बस
मसअला
दस्तरस
और
बस
यूँँ
बुनी
हैं
रगें
जिस्म
की
एक
नस
टस
से
मस
और
बस
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Ammar Iqbal
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ग़ैर
से
खेली
है
होली
यार
ने
डाले
मुझ
पर
दीदा-ए-ख़ूँ-बार
रंग
Imam Bakhsh Nasikh
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खँगालने
हैं
मुझे
अपने
सब
से
अच्छे
शे'र
जो
तुझ
को
रंग
दे
ऐसा
गुलाल
ढूँढ़ना
है
Amulya Mishra
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मुझ
सेे
पहले
कोई
रंग
लगाए
उनको
कैसे
सह
लें
यार
भला
ये
होली
में
हम
Priya Dixit
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आइने
में
देख
सकती
हो
अभी
रंग
मेरा
तुम
पे
अच्छा
लग
रहा
Neeraj Neer
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चले
भी
आओ
भुला
कर
सभी
गिले-शिकवे
बरसना
चाहिए
होली
के
दिन
विसाल
का
रंग
Azhar Iqbal
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अपने
जैसी
कोई
तस्वीर
बनानी
थी
मुझे
मिरे
अंदर
से
सभी
रंग
तुम्हारे
निकले
Salim Saleem
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मत
पूछ
कि
क्या
हाल
है
मेरा
तेरे
पीछे
तू
देख
कि
क्या
रंग
है
तेरा,
मेरे
आगे
Mirza Ghalib
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पूछते
हो
हमें
हुआ
क्या
है
हिज्र
में
दर्द
की
दवा
क्या
है
बुतपरस्ती
कोई
इबादत
है
क्या
पता
है
तुम्हें
ख़ुदा
क्या
है
सब्र
से
काम
लो
मोहब्बत
में
और
देखो
कि
ये
दु'आ
क्या
है
तेरी
हरक़त
बड़ी
पुरानी
है
बात
मालूम
है
नया
क्या
है
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Arohi Tripathi
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कभी
तो
पास
बैठो
तुम
हमारे
कि
जैसे
होश
भी
हो
गुम
हमारे
Arohi Tripathi
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मेरे
पैरों
की
पायल
से
कभी
घाइल
हुआ
था
वो
मेरी
आँखों
की
हरक़त
से
कभी
पागल
हुआ
था
वो
उसे
जब
याद
आएगा
करेगा
बात
वो
ख़ुद
से
इसी
वो
सोच
में
होगा
कभी
बेकल
हुआ
था
वो
परेशाँ
भी
मेरा
होना
समझ
से
बेमुनासिब
था
लगी
है
लत
शराबों
की
कभी
अफ़ज़ल
हुआ
था
वो
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Arohi Tripathi
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आप
मेरी
बात
मानो
इश्क़
कर
के
देख
लो
हैं
अगर
वो
मुझ
सेे
अच्छे
उन
पे
मर
के
देख
लो
मैं
ग़लत
हूँ
वो
सही
है
तुम
यही
हो
मानते
ख़ूब-सूरत
है
अगर
वो
आँख
भर
के
देख
लो
टूटकर
बिखरा
हुआ
है
काम
का
कुछ
भी
नहीं
सब
मोहब्बत
में
लुटा
है
हाल
घर
के
देख
लो
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गाल
ग़ुस्से
से
लाल
कर
बैठी
हद
से
ज़्यादा
जलाल
कर
बैठी
किस
लिए
याद
मैं
करूँँ
तुमको
तुमको
भूला
ख़याल
कर
बैठी
शाम
से
रात
हो
चली
है
अब
सारे
जुगनू
मशाल
कर
बैठी
तेरा
दुख
दर्द
सह
नहीं
सकती
क़त्ल
तेरा
हलाल
कर
बैठी
जो
भी
ठाना
वही
किया
मैंने
उसको
दिल
से
निकाल
कर
बैठी
जानती
ही
नहीं
मुझे
दुनिया
क्या
से
क्या
मैं
कमाल
कर
बैठी
इश्क़
उसका
गले
का
फंदा
था
शुक्र
है
वो
निकाल
कर
बैठी
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Arohi Tripathi
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