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Arohi Tripathi
badan ko choomna tha kaam uskaa
badan ko choomna tha kaam uskaa | बदन को चूमना था काम उसका
- Arohi Tripathi
बदन
को
चूमना
था
काम
उसका
अज़िय्यत
लग
रहा
था
नाम
उसका
मुझे
वो
क़र्ज़
जैसा
लग
रहा
था
मिला
था
यार
जो
इनआम
उसका
मुझे
वो
जिस
तरह
से
घूरता
है
बहुत
अच्छा
हुआ
अंजाम
उसका
- Arohi Tripathi
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उस
के
फ़रोग़-ए-हुस्न
से
झमके
है
सब
में
नूर
शम-ए-हरम
हो
या
हो
दिया
सोमनात
का
Meer Taqi Meer
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इश्क़
को
पूछता
नहीं
कोई
हुस्न
का
एहतिराम
होता
है
Asrar Ul Haq Majaz
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बदन
का
सारा
लहू
खिंच
के
आ
गया
रुख़
पर
वो
एक
बोसा
हमें
दे
के
सुर्ख़-रू
है
बहुत
Zafar Iqbal
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वो
लोग
हम
ही
थे
मुहब्बत
में
जो
फिर
आगे
हुए
वो
लोग
हम
ही
थे
मियाँ
जो
दूर
भागे
जिस्म
से
Kartik tripathi
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ख़याल
कब
से
छुपा
के
ये
मन
में
रक्खा
है
मिरा
क़रार
तुम्हारे
बदन
में
रक्खा
है
Siraj Faisal Khan
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तमाम
जिस्म
को
आँखें
बना
के
राह
तको
तमाम
खेल
मुहब्बत
में
इंतिज़ार
का
है
Munawwar Rana
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सख़्त
सर्दी
में
ठिठुरती
है
बहुत
रूह
मिरी
जिस्म-ए-यार
आ
कि
बेचारी
को
सहारा
मिल
जाए
Farhat Ehsaas
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आँसुओं
में
मिरे
काँधे
को
डुबोने
वाले
पूछ
तो
ले
कि
मिरे
जिस्म
का
सहरा
है
कहाँ
Pallav Mishra
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बदन
के
दोनों
किनारों
से
जल
रहा
हूँ
मैं
कि
छू
रहा
हूँ
तुझे
और
पिघल
रहा
हूँ
मैं
Irfan Siddiqi
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टूटा
तो
हूँ
मगर
अभी
बिखरा
नहीं
'फ़राज़'
मेरे
बदन
पे
जैसे
शिकस्तों
का
जाल
हो
Ahmad Faraz
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पीर
मुरशिद
के
पास
मत
जाना
अच्छे
ज़ाहिद
के
पास
मत
जाना
कुछ
भी
रद्द-ओ-बदल
नहीं
होगा
सच्चे
शाहिद
के
पास
मत
जाना
नब्ज़
अंदर
से
खोखला
हो
जब
दिल
के
आबिद
के
पास
मत
जाना
तुमको
अपना
बना
के
रक्खेगा
एक
वाहिद
के
पास
मत
जाना
एक
सजदे
से
काम
बनता
है
आप
मस्जिद
के
पास
मत
जाना
कर
के
ग़लती
ये
मैंने
देखा
है
अब
से
मुल्हिद
के
पास
मत
जाना
जो
सनम
की
करे
इबादत
तुम
ऐसे
साजिद
के
पास
मत
जाना
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Arohi Tripathi
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तुम्हारी
नींद
में
हम
नहीं
हैं
तुम्हारे
ख़्वाब
से
जा
चुके
हैं
Arohi Tripathi
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चूमकर
लब
बता
दिया
उसने
इश्क़
का
ढब
बता
दिया
उसने
ना-समझ
लड़की
को
मुहब्बत
से
क्या
मुतय्यब
बता
दिया
उसने
अपनी
बाहों
में
ले
के
पूछा
है
और
फिर
सब
बता
दिया
उसने
जिस्म
के
वो
सभी
सवालों
का
सारा
मतलब
बता
दिया
उसने
सो
गई
थी
मैं
उसकी
बाहों
में
आज
की
शब
बता
दिया
उसने
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Arohi Tripathi
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मिरा
दिल
ग़म
छुपाना
चाहता
है
मगर
तुम
सेे
बताना
चाहता
है
मुझे
अल्लाह
ने
बख़्शी
है
नेमत
वही
नेमत
ज़माना
चाहता
है
उठाऊँ
हाथ
माँगूँ
मैं
दुआएँ
ख़बर
है
क्या
दिवाना
चाहता
है
मुझे
कहता
है
तुमको
छोड़
दूँगा
मुझे
यूँँ
आज़माना
चाहता
है
जिसे
हमने
सिखाई
थी
मोहब्बत
वही
हमको
भुलाना
चाहता
है
अभी
तक
लौटकर
आया
नहीं
वो
वो
मुझ
सेे
दूर
जाना
चाहता
है
जिसे
हम
दिल
की
धड़कन
कह
रहे
थे
वही
हमको
मिटाना
चाहता
है
चलो
अब
चल
रहे
हैं
इस
जहाँ
से
बदन
अपना
ठिकाना
चाहता
है
हथेली
काट
ली
थी
जिसकी
ख़ातिर
वही
अब
छोड़
जाना
चाहता
है
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Arohi Tripathi
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माना
कि
आज
भी
मैं
पढ़ती
नहीं
नमाज़
लेकिन
ख़ुदा
क़सम
काफ़िर
नहीं
हूँ
मैं
Arohi Tripathi
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