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Mohd Arham
mohabbat ki ye pahli seedhi hai jaanaan
mohabbat ki ye pahli seedhi hai jaanaan | मोहब्बत की ये पहली सीढ़ी है जानाँ
- Mohd Arham
मोहब्बत
की
ये
पहली
सीढ़ी
है
जानाँ
मना
करते
नहीं
यूँँ
बोसे
को
अक्सर
- Mohd Arham
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यानी
अब
उसकी
मुहब्बत
का
हलफ़
माँगूँ
मैं
यानी
अब
सुर्ख़
लबों
पे
मैं
सियाही
फेंकूँ
anupam shah
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इश्क़
का
था
खेल
केवल
दौड़
का
बन
के
बल्लेबाज़
शामिल
हो
गया
Divy Kamaldhwaj
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मेरा
किरदार
मेरी
बात
कहाँ
सुनता
है
ये
समझदार
मेरी
बात
कहाँ
सुनता
है
इश्क़
है
वादा-फ़रामोश
नहीं
है
कोई
दिल
तलबगार
मेरी
बात
कहाँ
सुनता
है
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Vishal Singh Tabish
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तुम्हीं
से
प्यार
मुझको
इसलिए
है
ज़माना
आज़मा
कर
आ
गया
हूँ
Divy Kamaldhwaj
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इश्क़
के
इज़हार
में
हर-चंद
रुस्वाई
तो
है
पर
करूँँ
क्या
अब
तबीअत
आप
पर
आई
तो
है
Akbar Allahabadi
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इश्क़
क़ैस
फ़रहाद
रोमियो
जैसे
ही
कर
सकते
हैं
हम
तो
ठहरे
दस
से
छह
तक
ऑफ़िस
जाने
वाले
लोग
Vashu Pandey
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इश्क़
के
रंग
में
ऐ
मेरे
यार
रंग
आया
फिर
आज
रंगों
का
तेहवार
रंग
हो
गुलाबी
या
हो
लाल
पीला
हरा
आ
लगा
दूँ
तुझे
भी
मैं
दो
चार
रंग
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Afzal Ali Afzal
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फिर
वही
रोना
मुहब्बत
में
गिला
शिकवा
जहाँ
से
रस्म
है
बस
इसलिए
भी
तुम
को
साल-ए-नौ
मुबारक
Neeraj Neer
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दौलतें
मुद्दा
बनीं
या
ज़ात
आड़े
आ
गई
इश्क़
में
कोई
न
कोई
बात
आड़े
आ
गई
Baghi Vikas
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हर
मुलाक़ात
पे
सीने
से
लगाने
वाले
कितने
प्यारे
हैं
मुझे
छोड़
के
जाने
वाले
ज़िंदगी
भर
की
मोहब्बत
का
सिला
ले
डूबे
कैसे
नादाँ
थे
तिरे
जान
से
जाने
वाले
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Vipul Kumar
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ज़िन्दगी
थी
मेरी
भी
आँखों
में
जब
तलक
इक
परी
थी
आँखों
में
इसलिए
भी
ख़ुदा
के
पास
रहा
इक
नमाज़न
बसी
थी
आँखों
में
जिसकी
आँखों
में
लाख
चेहरे
हैं
उसका
चेहरा
है
मेरी
आँखों
में
दर्द
सारे
उभरते
जाते
हैं
जाने
सीलन
है
कैसी
आँखों
में
उसके
तोहफ़े
नहीं
किए
ज़ाया'
अश्क
अब
भी
हैं
मेरी
आँखों
में
हाए
'अरहम'
ये
आपका
दुख
भी
रह
न
जाए
किसी
की
आँखों
में
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Mohd Arham
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मोहब्बत
हो
गई
है
खेल
की
बाज़ी
बिछड़
के
अब
कोई
लैला
नहीं
मरती
Mohd Arham
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मेरे
सिर
पे
है
ज़िम्मेदारी
बहनों
की
सो
मुझको
इश्क़
से
मुँह
मोड़ना
होगा
Mohd Arham
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दु'आ
में
इक
परिंदे
ने
ये
माँगा
ख़ुदाया
अब
नया
सय्याद
आए
Mohd Arham
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ऐसा
लगता
है
देखी
दाखी
है
ज़िंदगी
कोई
फ़िल्म
जैसी
है
पाँव
फैला
के
देखा
तो
जाना
दुनिया
कमरे
से
ज़्यादा
छोटी
है
हिज्र
के
दिन
हैं
और
घड़ी
उस
पर
जाने
क्यूँ
उल्टे
पाँव
चलती
है
हाफ़िज़ा
कौन
कर
रहा
है
मेरा
किसके
रटने
से
हिचकी
आई
है
एक
रस्ता
है
आप
तक
जाता
और
उस
में
भी
अफ़रा
तफ़री
है
मैं
मुदावा
करूँगा
क्यूँँ
ग़म
का
मुझको
प्यारी
मेरी
उदासी
है
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Mohd Arham
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