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Ankit
dil men utarna tha use
dil men utarna tha use | दिल में उतरना था उसे
- Ankit
दिल
में
उतरना
था
उसे
दिल
से
ही
वो
उतर
गया
- Ankit
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वही
शागिर्द
फिर
हो
जाते
हैं
उस्ताद
ऐ
'जौहर'
जो
अपने
जान-ओ-दिल
से
ख़िदमत-ए-उस्ताद
करते
हैं
Lala Madhav Ram Jauhar
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न
तेरे
आने
से
मेरा
शबाब
लौटा
है
न
दिल
लगाने
से
मेरा
शबाब
लौटा
है
क़सम
ख़ुदा
की
बताता
हूँ
राज़
ये
तुमको
नहारी
खाने
से
मेरा
शबाब
लौटा
है
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Paplu Lucknawi
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हमने
जिस
मासूम
परी
को
अपने
दिल
की
जाँ
बोला
था
उसने
हमको
धोखा
देकर
और
किसी
को
हाँ
बोला
था
सारे
वादे
भूल
गई
तुम
कोई
बात
नहीं
जानेमन
लेकिन
ये
कैसे
भूली
तुम
मेरी
माँ
को
माँ
बोला
था
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Tanoj Dadhich
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तिरंगा
दिल
में
है
लबों
पे
हिंदुस्तान
रखता
हूँ
सिपाही
हूँ
हथेली
पे
मैं
अपनी
जान
रखता
हूँ
Shashank Shekhar Pathak
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रातें
किसी
याद
में
कटती
हैं
और
दिन
दफ़्तर
खा
जाता
है
दिल
जीने
पर
माएल
होता
है
तो
मौत
का
डर
खा
जाता
है
सच
पूछो
तो
'तहज़ीब
हाफ़ी'
मैं
ऐसे
दोस्त
से
आज़िज़
हूँ
मिलता
है
तो
बात
नहीं
करता
और
फोन
पे
सर
खा
जाता
है
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Tehzeeb Hafi
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उस
के
दिल
की
आग
ठंडी
पड़
गई
मुझ
को
शोहरत
मिल
गई
इल्ज़ाम
से
Siraj Faisal Khan
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शक
है
तुझे
अगर
ये
अब
भी
गुदाज़
है
दिल
तो
सीने
से
कभी
ये
पत्थर
निकाल
मेरा
Abhay Aadiv
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देखिए
होगा
श्री-कृष्ण
का
दर्शन
क्यूँँ-कर
सीना-ए-तंग
में
दिल
गोपियों
का
है
बेकल
Mohsin Kakorvi
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कैसा
दिल
और
इस
के
क्या
ग़म
जी
यूँँ
ही
बातें
बनाते
हैं
हम
जी
Jaun Elia
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हम
लबों
से
कह
न
पाए
उन
से
हाल-ए-दिल
कभी
और
वो
समझे
नहीं
ये
ख़ामुशी
क्या
चीज़
है
Nida Fazli
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आशिक़ी
को
पढ़ने
में
पूरा
साल
लगता
है
और
फ़ैल
होने
में
इक
सवाल
लगता
है
अच्छा
लगता
है
जब
तू
हँसके
देखता
है,पर
जब
भी
देखकर
हँसता
है
कमाल
लगता
है
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Ankit
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क्यूँँ
है
तू
ऐसे
खफ़ा
क्या
ग़म
है
आ
इधर
बैठ
बता
क्या
ग़म
है
कोई
भी
तो
तेरी
जानिब
है
नहीं
फिर
यहाँ
कैसा
मज़ा
क्या
ग़म
है
वो
रिझाता
नहीं
है
क्यूँँं
मुझको
उसको
भी
तो
है
पता
क्या
ग़म
है
जन्मदिन
पे
यूँँ
ही
ख़ुश
हैं
ये
लोग
जन्म
लेने
से
बड़ा
क्या
ग़म
है
उसको
ये
ग़म
है
कि
मैं
हूँ
ग़मगीन
इस
सेे
प्यारा-ओ-भला
क्या
ग़म
है
हमने
सोचा
था
ख़सारा
होगा
हो
गया
उल्टा
नफ़ा
क्या
ग़म
है
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Ankit
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उसकी
बातें
इतनी
मीठी
लगती
है
फिर
हमारी
चाय
फ़ीकी
लगती
है
Ankit
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जैसे
उस
एक
दिए
ने
रात
का
ख़्याल
रखा
है
मेरे
सन्नाटों
को
तेरी
आवाज़
ने
संभाल
रखा
है
Ankit
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मैं
ख़ुशी
से
कर
लेता,
खुद-कुशी,
कई
सौ
बार
मुझ
को
खा
गया
घर
का
ख़्याल
भी,
उन्हीं
सौ
बार
Ankit
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