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kanak anamika khantwal
zindagi men ho rahe har haadse ko ek ghar hai
zindagi men ho rahe har haadse ko ek ghar hai | ज़िंदगी में हो रहे हर हादसे को एक घर है
- kanak anamika khantwal
ज़िंदगी
में
हो
रहे
हर
हादसे
को
एक
घर
है
हारकर
अपना
सभी
कुछ
लौटने
को
एक
घर
है
- kanak anamika khantwal
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कुछ
बेटियाँ
बिन
बाप
के
भी
काटती
हैं
ज़िंदगी
कुछ
बेटियों
के
सिर
पे
दोनों
हाथ
माँ
के
होते
हैं
Bhoomi Srivastava
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तल्ख़ियाँ
इस
में
बहुत
कुछ
हैं
मज़ा
कुछ
भी
नहीं
ज़िंदगी
दर्द-ए-मोहब्बत
के
सिवा
कुछ
भी
नहीं
Kaleem Aajiz
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धूप
में
निकलो
घटाओं
में
नहा
कर
देखो
ज़िंदगी
क्या
है
किताबों
को
हटा
कर
देखो
Nida Fazli
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ज़िंदगी
क्या
किसी
मुफ़लिस
की
क़बा
है
जिस
में
हर
घड़ी
दर्द
के
पैवंद
लगे
जाते
हैं
Faiz Ahmad Faiz
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तेरे
बग़ैर
भी
तो
ग़नीमत
है
ज़िंदगी
ख़ुद
को
गँवा
के
कौन
तेरी
जुस्तुजू
करे
Ahmad Faraz
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मुझे
चाह
थी
किसी
और
की,
प
मुझे
मिला
कोई
और
है
मेरी
ज़िन्दगी
का
है
और
सच,
मेरे
ख़्वाब
सा
कोई
और
है
तू
क़रीब
था
मेरे
जिस्म
के,
बड़ा
दूर
था
मेरी
रूह
से
तू
मेरे
लिए
मेरे
हमनशीं
कोई
और
था
कोई
और
है
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Avtar Singh Jasser
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ज़िंदगी
ज़िंदा-दिली
का
है
नाम
मुर्दा-दिल
ख़ाक
जिया
करते
हैं
Imam Bakhsh Nasikh
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गँवाई
किस
की
तमन्ना
में
ज़िंदगी
मैं
ने
वो
कौन
है
जिसे
देखा
नहीं
कभी
मैं
ने
Jaun Elia
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बस
एक
मोड़
मिरी
ज़िंदगी
में
आया
था
फिर
इस
के
बाद
उलझती
गई
कहानी
मेरी
Abbas Tabish
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आधी
आधी
रात
तक
सड़कों
के
चक्कर
काटिए
शा'इरी
भी
इक
सज़ा
है
ज़िंदगी
भर
काटिए
कोई
तो
हो
जिस
से
उस
ज़ालिम
की
बातें
कीजिए
चौदहवीं
का
चाँद
हो
तो
रात
छत
पर
काटिए
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Nisar Nasik
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मिला
ही
नहीं
प्यार
ऐसा
कहीं
भी
लिखा
नाम
दिल
पर,
नहीं
फिर
मिटाया
kanak anamika khantwal
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ना
किसी
से
आस,
रहमत
ख़ुद-कुशी
मौत
से
बेकार,
आफ़त
ख़ुद-कुशी
महफ़िलों
में
जब
सुनाया
सब
हंसे
है
लतीफ़ा
या
सियासत
ख़ुद-कुशी
वो
मुझे
रोने
नहीं
देते
मगर
बोलते
हैं
सब
जहालत
ख़ुद-कुशी
बेबसी
कुछ
इस
तरह
घेरे
मुझे
ज़िंदगी
की
एक
क़ीमत
ख़ुद-कुशी
रात
के
ही
बाद
होती
है
सुब्ह
है
ग़लतफ़हमी
कि
नेमत
ख़ुद-कुशी
गर
सुकूँ
ख़ुद
को
मिटा
कर
ना
मिला
है
जहन्नम
की
अज़िय्यत
ख़ुद-कुशी
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kanak anamika khantwal
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नाम
इतना
तो
मुहब्बत
में
नहीं
था
या
ख़ुदा!
मशहूर
जितनी
ये
अदावत
kanak anamika khantwal
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सियासत
खेलना
भी
है
ज़रूरी
करूँँगी
मौत
का
भी
मैं
तमाशा
kanak anamika khantwal
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मुझे
अब
भी
नहीं
करना
तमाशा
वो
इक
ही
रात
का
झूठा
तमाशा
ज़रा
सी
बात
पर
जो
टूट
जाए
ये
रिश्तों
का
लगा
कैसा
तमाशा
वो
मुर्दा
खु़द
निकल
कर
दे
गवाही
करो
तो
फिर
करो
ऐसा
तमाशा
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kanak anamika khantwal
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