kabhi zaraa paas aa ke baitho nayi jawaani chahak rahi hai | कभी ज़रा पास आ के बैठो नई जवानी चहक रही है

  - Amaan Pathan
कभीज़रापासकेबैठोनईजवानीचहकरहीहै
नईउमंगइकनईतरंगइकनयेचमनमेंचमकरहीहै
मैंआजजोभीकहूँगातुमसेवोसचहैजानमयेजानलोतुम
हरएकमिसरेसेइसग़ज़लकेमिरीमुहब्बतछलकरहीहै
निगाहमेंइकहयाहैक़ायमयेतेज़साँसेंयेसुर्ख़आरिज़
मुझेख़बरहैमुझेपताहैदबीनज़रसेवोतकरहीहै
ज़मानाचाहेजोआजकरलेनहींरुकेंगेक़दमहमारे
जिसआगसेआफ़ताबरौशनवोआगदिलमेंधधकरहीहै
नयानयाहैयेइश्क़प्यारेनयानयाहैमुग़ालताये
वोबीरबलकीपुरानीखिचड़ीनयेतरीक़ेसेपकरहीहै
  - Amaan Pathan
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