nikhat-e-gul aaj-kal mujh ko sataati hai bahut | निकहत-ए-गुल आज-कल मुझ को सताती है बहुत

  - Amaan Pathan
निकहत-ए-गुलआज-कलमुझकोसतातीहैबहुत
एकलड़कीख़्वाबमेंकरजगातीहैबहुत
एकतिलजोगालपरहैमो'जिज़ासाहैकोई
आब्शारोंजैसीउसकीज़ुल्फ़भातीहैबहुत
हैंख़ुतूत-ए-जिस्ममेंतारेजड़ेजैसेकई
वोहसींजान-ए-जिगरमुझकोलुभातीहैबहुत
वोअगरहँसदेतोमैंलिखदूँक़सीदेचाँदतक
इश्क़करनेकासलीक़ावोसिखातीहैबहुत
दरमियाँहैंफ़ासलेयेजानतेहैंहममगर
रातभरफिरभीहमेंवोयादआतीहैबहुत
चाहताहूँज़िन्दगीभरमुस्कुरातीवोरहे
देखकरउसकीउदासीजानजातीहैबहुत
अमानअबक्याकरूँँउसकोमनानेकेलिए
रूठकरमुझसेेवोमेरादिलजलातीहैबहुत
  - Amaan Pathan
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