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Alankrat Srivastava
zindagi kii uljhnon kii fikr karna chhod kar ham
zindagi kii uljhnon kii fikr karna chhod kar ham | ज़िन्दगी की उलझनों की फ़िक्र करना छोड़ कर हम
- Alankrat Srivastava
ज़िन्दगी
की
उलझनों
की
फ़िक्र
करना
छोड़
कर
हम
तेरी
ज़ुल्फों
में
उलझने
की
तमन्ना
कर
रहे
हैं
- Alankrat Srivastava
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बद-हवा
सेी
है
बे-ख़याली
है
क्या
ये
हालत
भी
कोई
हालत
है
ज़िंदगी
से
है
जंग
शाम-ओ-सहर
मौत
से
शिकवा
है
शिकायत
है
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Chandan Sharma
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हाए
क्या
दौर-ए-ज़िंदगी
गुज़रा
वाक़िए
हो
गए
कहानी
से
Gulzar Dehlvi
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ज़िंदगी
और
चल
नहीं
सकती
आने
पे
मौत
टल
नहीं
सकती
Afzal Sultanpuri
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खेल
ही
तो
है
जहाँ
मैं
उसका
हूँ
ज़िन्दगी
ये
ट्वीट
बदलेगी
कभी
Neeraj Neer
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मैं
ने
आबाद
किए
कितने
ही
वीराने
'हफ़ीज़'
ज़िंदगी
मेरी
इक
उजड़ी
हुई
महफ़िल
ही
सही
Hafeez Banarasi
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ज़िंदगी
तू
ने
मुझे
क़ब्र
से
कम
दी
है
ज़मीं
पाँव
फैलाऊँ
तो
दीवार
में
सर
लगता
है
Bashir Badr
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आधी
आधी
रात
तक
सड़कों
के
चक्कर
काटिए
शा'इरी
भी
इक
सज़ा
है
ज़िंदगी
भर
काटिए
कोई
तो
हो
जिस
से
उस
ज़ालिम
की
बातें
कीजिए
चौदहवीं
का
चाँद
हो
तो
रात
छत
पर
काटिए
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Nisar Nasik
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तुम
भी
साबित
हुए
कमज़ोर
मुनव्वर
राना
ज़िन्दगी
माँगी
भी
तुमने
तो
दवा
से
माँगी
Munawwar Rana
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किराए
के
घर
में
गई
ज़िन्दगी
कहाँ
ज़िन्दगी
में
रही
ज़िन्दगी
Umesh Maurya
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ज़िंदगी
क्या
किसी
मुफ़लिस
की
क़बा
है
जिस
में
हर
घड़ी
दर्द
के
पैवंद
लगे
जाते
हैं
Faiz Ahmad Faiz
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तुम
सेे
सुंदर
होंगी
तो
होंगी
बस
राधा
रानी
जू
वरना
तो
तीनों
लोकों
में
तुम
सेा
सुंदर
कोई
नईं
Alankrat Srivastava
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किसी
शायर
का
कोई
शे'र
यूँँ
बेकार
नईं
होता
मगर
हाँ
हर
किसी
को
हर
किसी
से
प्यार
नईं
होता
Alankrat Srivastava
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न
मिले
मुझे
मुझ
से
हो
गया
ज़माना
इक
क्या
कहें
उन्हें
जो
मेरा
हाल
पूछते
हैं
अब
Alankrat Srivastava
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जो
मेरे
दर्द
समझने
का
दावा
करते
हैं
झूठे
हैं
सबके
सब
सिर्फ़
दिखावा
करते
हैं
Alankrat Srivastava
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अगर
तुम
कहो
हम
बदल
जाते
हैं
जी
हैं
पत्थर
मगर
हम
पिघल
जाते
हैं
जी
अमीरी
बुलंदी
की
चाहत
न
थी
सो
ग़रीबी-फ़क़ीरी
में
पल
जाते
हैं
जी
सभी
गीत
उन
पर
ना
थे
पर
हुआ
यूँँ
सभी
गीत
में
वो
तो
ढल
जाते
हैं
जी
ख़ता
मेरी
इस
में
नहीं
थोड़ी
सी
भी
सभी
को
भले
लोग
खल
जाते
हैं
जी
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Alankrat Srivastava
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