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Aqib khan
kis kadar muhabbat hai aadmi ke dil men bhi
kis kadar muhabbat hai aadmi ke dil men bhi | किस कदर मुहब्बत है आदमी के दिल में भी
- Aqib khan
किस
कदर
मुहब्बत
है
आदमी
के
दिल
में
भी
क़ैद
करके
पंछी
को
हम
सेफ़र
बताता
है
- Aqib khan
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कुछ
लोग
हैं
जो
झेल
रहे
हैं
मुसीबतें
कुछ
लोग
हैं
जो
वक़्त
से
पहले
बदल
गए
Shakeel Jamali
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मिरी
ज़बान
के
मौसम
बदलते
रहते
हैं
मैं
आदमी
हूँ
मिरा
ए'तिबार
मत
करना
Asim Wasti
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बहुत
से
लोग
हैं
तस्वीर
में
अच्छे
बहुत
अच्छे
तेरे
चेहरे
पे
ही
मेरी
नज़र
हरदम
ठहरती
है
Umesh Maurya
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मत
सहल
हमें
जानो
फिरता
है
फ़लक
बरसों
तब
ख़ाक
के
पर्दे
से
इंसान
निकलते
हैं
Meer Taqi Meer
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उसको
जो
कुछ
भी
कहूँ
अच्छा
बुरा
कुछ
न
करे
यार
मेरा
है
मगर
काम
मेरा
कुछ
न
करे
दूसरी
बार
भी
पड़
जाए
अगर
कुछ
करना
आदमी
पहली
मोहब्बत
के
सिवा
कुछ
न
करे
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Abid Malik
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ज़िक्र
तबस्सुम
का
आते
ही
लगते
हैं
इतराने
लोग
और
ज़रा
सी
ठेस
लगी
तो
जा
पहुँचे
मयख़ाने
लोग
Ateeq Allahabadi
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सब
लोग
जिधर
वो
हैं
उधर
देख
रहे
हैं
हम
देखने
वालों
की
नज़र
देख
रहे
हैं
Dagh Dehlvi
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अच्छों
से
पता
चलता
है
इंसाँ
को
बुरों
का
रावन
का
पता
चल
न
सका
राम
से
पहले
Rizwan Banarasi
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यार
तस्वीर
में
तन्हा
हूँ
मगर
लोग
मिले
कई
तस्वीर
से
पहले
कई
तस्वीर
के
बा'द
Umair Najmi
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समझ
से
काम
जो
लेता
हर
एक
बशर
'ताबाँ'
न
हाहा-कार
ही
मचते
न
घर
जला
करते
Anwar Taban
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पड़
गया
है
शादी
पर
खानदान
से
मतलब
इश्क़
में
किसे
था
दुनिया
जहान
से
मतलब
आपकी
ये
बेटी
हक़
माँगने
न
लग
जाए
देखिए
हमें
तो
है
बेज़ुबान
से
मतलब
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Aqib khan
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हड़प्पा
के
मकानों
में
हैं
रौशनदान
दरवाज़े
मगर
वो
लोग
ताका-झाँकी
को
खिड़की
नहीं
रखते
Aqib khan
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सुनो
गर
ऐसा
करना
ही
जो
तुमको
अच्छा
लगता
है
तो
तुम
आ
जाना
फिर
से
और
दिल
को
तोड़
जाना
फिर
Aqib khan
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मुझको
मरवा
के
ही
छोड़ेगी
ये
ताख़ीर
मेरी
उसकी
गर्दन
पे
जो
रुक
जाए
है
शमशीर
मेरी
Aqib khan
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बे
बसी
की
आबरू
रक्खी
है
हमने
इस
तरह
हिज्र
को
बोला
है
साथी
इश्क़
जब
रुख़्सत
हुआ
Aqib khan
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