उसेभुलानेकीहरहदतलकगयाहूँमैं
सफ़रतवीलथाइतनाकेथकगयाहूँमैं
यूँँबे-सबबमुझेमय-ख्वारक्यूँसमझतेहो
किसीकेदेखनेभरसेबहकगयाहूँमैं
कोईजोपूछेमेरेबादउससेेकहदेना
ज़मींथीरासनआई,फ़लकगयाहूँमैं
किराह-ए-इश्क़चुनीहैयेख़ुदकीमर्ज़ीसे
समझरहेहैंवोभटके...भटकगयाहूँमैं
रुकीहुईकिसीनंबरपेउससुईकीतरह
किसीचुड़ैलपेआकरअटकगयाहूँमैं
मुझेयेडरथाकहींज़ख़्मभरनजाएँमिरे
सोउनपेमाज़ीकीमिर्चीछिड़कगयाहूँमैं