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Mohd Afsar
december ki sar
december ki sar | दिसम्बर की सर्दी है बस तुम नहीं हो
- Mohd Afsar
दिसम्बर
की
सर्दी
है
बस
तुम
नहीं
हो
अकेली
रज़ाई
से
रुकती
नहीं
ठंड
- Mohd Afsar
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ये
कह
के
दिल
ने
मिरे
हौसले
बढ़ाए
हैं
ग़मों
की
धूप
के
आगे
ख़ुशी
के
साए
हैं
Mahirul Qadri
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कतराते
हैं
बल
खाते
हैं
घबराते
हैं
क्यूँँ
लोग
सर्दी
है
तो
पानी
में
उतर
क्यूँँ
नहीं
जाते
Mahboob Khizan
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सर्दी
है
कि
इस
जिस्म
से
फिर
भी
नहीं
जाती
सूरज
है
कि
मुद्दत
से
मिरे
सर
पर
खड़ा
है
Fakhr Zaman
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सफ़र
में
धूप
तो
होगी
जो
चल
सको
तो
चलो
सभी
हैं
भीड़
में
तुम
भी
निकल
सको
तो
चलो
Nida Fazli
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सख़्त
सर्दी
में
ठिठुरती
है
बहुत
रूह
मिरी
जिस्म-ए-यार
आ
कि
बेचारी
को
सहारा
मिल
जाए
Farhat Ehsaas
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ये
कांटे,
ये
धूप,
ये
पत्थर
इनसे
कैसा
डरना
है
राहें
मुश्किल
हो
जाएँ
तो
छोड़ी
थोड़ी
जाती
हैं
Subhan Asad
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सूरज
लिहाफ़
ओढ़
के
सोया
तमाम
रात
सर्दी
से
इक
परिंदा
दरीचे
में
मर
गया
Athar nasik
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पास
हमारे
आकर
वो
शर्माती
है
तब
जाकर
के
एक
ग़ज़ल
हो
पाती
है
उसको
छूना
छोटा
मोटा
खेल
नहीं
गर्मी
क्या
सर्दी
में
लू
लग
जाती
है
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Tanoj Dadhich
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रात
बेचैन
सी
सर्दी
में
ठिठुरती
है
बहुत
दिन
भी
हर
रोज़
सुलगता
है
तिरी
यादों
से
Amit Sharma Meet
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सावन-रुत
और
उड़ती
पुर्वा
तेरे
नाम
धूप-नगर
से
है
ये
तोहफ़ा
तेरे
नाम
Tajdar Adil
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कितने
हैं
चाहने
वाले
अब
ये
देखना
है
मेरे
यहाँ
से
जाने
के
बाद
कौन
रोया
Mohd Afsar
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मेरी
नज़र
में
उसने
जब
उस
नज़र
से
देखा
दिल
में
मेरे
ये
कैसे
जज़्बात
आ
रहे
हैं
Mohd Afsar
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इस
जहाँ
में
सब
सेे
है
बड़ा
फ़साद
नौकरी
पहले
शा'इरी
है
फिर
वो
उसके
बाद
नौकरी
कुछ
नसीब
अच्छी
भी
हो
थोड़ी
सी
ख़राब
भी
साथ-साथ
में
हो
तेरे
शाद-शाद
नौकरी
मैं
तो
चाहता
हूँ
कुछ
अलग
हो
मेरे
साथ
में
कितने
आलिमों
का
मंज़िल-ए-मुराद
नौकरी
जो
किसी
का
भी
न
हो
रहा
था
अब
वो
मेरा
है
मैं
तो
बस
यही
कहूँगा
धन्यवाद
नौकरी
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Mohd Afsar
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मेरे
तबीब,
मिरा
भी
कभी
इलाज
बता
जी
कल
का
क्या
है,
नहीं
कल
नहीं
तू
आज
बता
Mohd Afsar
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मैं
याद-ए-रफ़्तगाँ
की
याद
में
बहुत
रोया
तभी
तो
वक़्त-ए-मुलाक़ात
में
बहुत
रोया
Mohd Afsar
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