main davaa poochhte firta tha zamaane bhar se | मैं दवा पूछते फिरता था ज़माने भर से

  - Aditya Singh aadi
मैंदवापूछतेफिरताथाज़मानेभरसे
भरगएज़ख़्मतेरेहाथलगानेभरसे
बादमुद्दतकेबड़ेचैनसेसोयाथामैं
उड़गईनींदतेरेख़्वाबमेंआनेभरसे
इसलिएभीनहींरखताहूँकिसीसेपर्दा
खुलभीजातेहैंकईराज़छुपानेभरसे
अबतोलगताहैकिमस्तकहीचढ़ानाहोगा
कौनसुनताहैयहाँदूधचढ़ानेभरसे
जानेकितनेहीअँधेरोंमेंउजालाहोगा
उसकेचेहरेपेपड़ीज़ुल्फ़हटानेभरसे
मैंइसउम्मीदमेंदेताहूँसदाऍंउसको
लौटआएगावोआवाज़लगानेभरसे
बहरहेथेजोरगोंमेंतोलहूथेहमभी
होगएअश्क‌फ़क़तआँखमेंआनेभरसे
  - Aditya Singh aadi
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