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Adarsh Anand Amola
ye inaayat ki hi azmat hai sitamgar tujh men
ye inaayat ki hi azmat hai sitamgar tujh men | ये इनायत की ही 'अज़मत है सितमगर तुझ में
- Adarsh Anand Amola
ये
इनायत
की
ही
'अज़मत
है
सितमगर
तुझ
में
कोई
बंजर
सी
ज़मीं
फूल
खिला
सकती
हो
- Adarsh Anand Amola
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ज़ख़्म
है
दर्द
है
दवा
भी
है
जैसे
जंगल
है
रास्ता
भी
है
यूँँ
तो
वादे
हज़ार
करता
है
और
वो
शख़्स
भूलता
भी
है
हम
को
हर
सू
नज़र
भी
रखनी
है
और
तेरे
पास
बैठना
भी
है
यूँँ
भी
आता
नहीं
मुझे
रोना
और
मातम
की
इब्तिदा
भी
है
चूमने
हैं
पसंद
के
बादल
शाम
होते
ही
लौटना
भी
है
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Karan Sahar
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बहरस
ख़ारिज
हूँ
ये
मालूम
है
पर
तुम्हारी
ही
ग़ज़ल
का
शे'र
हूँ
Gyan Prakash Akul
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साथ
चलते
जा
रहे
हैं
पास
आ
सकते
नहीं
इक
नदी
के
दो
किनारों
को
मिला
सकते
नहीं
उसकी
भी
मजबूरियाँ
हैं
मेरी
भी
मजबूरियाँ
रोज़
मिलते
हैं
मगर
घर
में
बता
सकते
नहीं
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Bashir Badr
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पहले
उसकी
ख़ुशबू
मैंने
ख़ुद
पर
तारी
की
फिर
मैंने
उस
फूल
से
मिलने
की
तैयारी
की
इतना
दुख
था
मुझको
तेरे
लौट
के
जाने
का
मैंने
घर
के
दरवाजों
से
भी
मुँह
मारी
की
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Tehzeeb Hafi
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पूरी
कायनात
में
एक
क़ातिल
बीमारी
की
हवा
हो
गई
वक़्त
ने
कैसा
सितम
ढाया
कि
दूरियाँ
ही
दवा
हो
गईं
Unknown
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कोई
समुंदर,
कोई
नदी
होती
कोई
दरिया
होता
हम
जितने
प्यासे
थे
हमारा
एक
गिलास
से
क्या
होता
ताने
देने
से
और
हम
पे
शक
करने
से
बेहतर
था
गले
लगा
के
तुमने
हिजरत
का
दुख
बाट
लिया
होता
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Tehzeeb Hafi
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अपनी
क़िस्मत
में
सभी
कुछ
था
मगर
फूल
ना
थे
तुम
अगर
फूल
ना
होते
तो
हमारे
होते
Ashfaq Nasir
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नहीं
आबो
हवा
में
ताज़गी
अब
दवा
की
सीसियों
में
ज़िन्दगी
है
Umesh Maurya
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चल
दिए
घर
से
तो
घर
नहीं
देखा
करते
जाने
वाले
कभी
मुड़
कर
नहीं
देखा
करते
सीपियां
कौन
किनारे
से
उठा
कर
भागा
ऐसी
बाते
समुंदर
नहीं
देखा
करते
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Unknown
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घर
की
तक़सीम
में
अँगनाई
गँवा
बैठे
हैं
फूल
गुलशन
से
शनासाई
गँवा
बैठे
हैं
बात
आँखों
से
समझ
लेने
का
दावा
मत
कर
हम
इसी
शौक़
में
बीनाई
गँवा
बैठे
हैं
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Abrar Kashif
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इब्तिदा
यूँँ
की
तेरी
तरफ़
रहगुज़र
मुस्कुराने
लगा
देख
मुझको
तेरी
राह
में
हर
शजर
मुस्कुराने
लगा
Adarsh Anand Amola
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यूँँ
ही
अब
वक़्त
ऐसे
ढल
रहा
है
जब
से
तू
यार
तन्हा
चल
रहा
है
कल
तुझे
चूमा
था
ज़रा
मैंने
कल
से
मेरा
ये
दिल
उछल
रहा
है
उसकी
आहट
दिनों
से
आई
नहीं
मेरा
दिल
अब
बहुत
मचल
रहा
है
तेरे
जाने
के
बाद
ये
मन
अब
तेरी
तस्वीर
से
बहल
रहा
है
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Adarsh Anand Amola
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लेटे
है
शांत
सी
नदी
के
पास
फिर
भी
दिल
जा
रहा
उसी
के
पास
Adarsh Anand Amola
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लगा
है
गिराने
जो
तू
मुझ
को
मत
कर
मेरी
पहली
ही
चाल
शह-मात
होगी
Adarsh Anand Amola
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तेरे
बालों
की
ख़ुश्बू
कहती
है
तू
किसी
तीसरे
से
मिल
रहा
है
Adarsh Anand Amola
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