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Abha sethi
ghere mujhko teri baanhe hain aise
ghere mujhko teri baanhe hain aise | घेरे मुझको तेरी बाँहे हैं ऐसे
- Abha sethi
घेरे
मुझको
तेरी
बाँहे
हैं
ऐसे
लिपटे
मन्नत
का
धागा
कोई
जैसे
- Abha sethi
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मैं
सो
रहा
हूँ
तेरे
ख़्वाब
देखने
के
लिए
ये
आरज़ू
है
कि
आँखों
में
रात
रह
जाए
Shakeel Azmi
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हम
क्या
करें
अगर
न
तिरी
आरज़ू
करें
दुनिया
में
और
भी
कोई
तेरे
सिवा
है
क्या
Hasrat Mohani
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ज़ख़्म
उनके
लिए
मेहमान
हुआ
करते
हैं
मुफ़लिसी
जो
तेरे
दरबान
हुआ
करते
हैं
वो
अमीरों
के
लिए
आम
सी
बातें
होंगी
हम
ग़रीबों
के
जो
अरमान
हुआ
करते
हैं
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Mujtaba Shahroz
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सजा
है
प्रेम
का
उपवन
तुम्हीं
से
हमारी
चाह
है
पावन
तुम्हीं
से
सभी
में
प्रेम
देखें
प्रेम
चाहें
मिली
है
ये
मुझे
चितवन
तुम्हीं
से
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Vikas Sahaj
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चाहत
में
मर
जाने
वाली
लड़की
हो
तुम
सचमुच
अफ़साने
वाली
लड़की
हो
आख़िरी
बैंच
पे
बैठने
वाला
लड़का
मैं
जाओ
तुम
अव्वल
आने
वाली
लड़की
हो
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Zubair Ali Tabish
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पुरानी
चाहत
के
ज़ख़्म
अब
तक
भरे
नहीं
हैं
और
एक
लड़की
पड़ी
है
पीछे
बड़े
जतन
से
Ashu Mishra
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नाज़-ओ-नख़रे
क्या
उठाए,
क्या
सुने
उस
के
गिले
देखते
ही
देखते
लड़की
घमंडी
हो
गई
देखते
रहने
में
उस
को
और
क्या
होता,
मगर
जो
थी
जान-ए-आरज़ू,
वो
चाय
ठंडी
हो
गई
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Kazim Rizvi
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मैं
चाहता
यही
था
सब
चाह
ख़त्म
हो
अब
फिर
चाहकर
तुम्हें
बदला
ये
ख़याल
मेरा
Abhay Aadiv
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किसी
के
ज़ख़्म
पर
चाहत
से
पट्टी
कौन
बाँधेगा
अगर
बहनें
नहीं
होंगी
तो
राखी
कौन
बाँधेगा
Munawwar Rana
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ये
क़त्ल-ए-आम
और
बे-इज़्न
क़त्ल-ए-आम
क्या
कहिए
ये
बिस्मिल
कैसे
बिस्मिल
हैं
जिन्हें
क़ातिल
नहीं
मिलता
वहाँ
कितनों
को
तख़्त
ओ
ताज
का
अरमाँ
है
क्या
कहिए
जहाँ
साइल
को
अक्सर
कासा-ए-साइल
नहीं
मिलता
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Asrar Ul Haq Majaz
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है
न
कुछ
ही
रौनक़ें
फीकी
सी
है
कुछ
ज़ीस्त
ये
बैठ
मेरे
सामने
मीठी
ग़ज़ल
इक
कहनी
है
Abha sethi
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चाल
पे
समय
की
भी
न
दाव
चल
ही
हम
सके
दे
सके
न
शह
ही
के
खिला
सके
न
मात
थी
Abha sethi
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कर
दिया
हवाले
अब
थाम
ले
या
ठुकरा
दे
हैं
थिरकते
जिस्म-ओ-जाँ
तेरे
इश्क़
में
बे-सुध
Abha sethi
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तुम्हें
कुछ
यूँँ
भी
ख़ुद
में
है
जिया
मैंने
तिरी
यादों
का
हर
क़तरा
पिया
मैंने
Abha sethi
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टूट
के
बिखरूँ
तो
सुकूँ
मेरा
तेरी
ही
बाँहों
का
बिछोना
हो
Abha sethi
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