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Aditya
shaKHs mujhe jo bha jaata hai
shaKHs mujhe jo bha jaata hai | शख़्स मुझे जो भा जाता है
- Aditya
शख़्स
मुझे
जो
भा
जाता
है
मुझको
छोड़
चला
जाता
है
इल्म
किताबों
के
बाहर
का
इश्क़
हमें
सिखला
जाता
है
हिजरत
के
कुछ
दिन
पहले
से
दुगना
इश्क़
किया
जाता
है
जिस
में
बर्बादी
तय
हो
फिर
क्यूँँं
वो
काम
किया
जाता
है
एक
वही
टूटा
सा
सपना
नींदें
मेरी
खा
जाता
है
- Aditya
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कैसी
बिपता
पाल
रखी
है
क़ुर्बत
की
और
दूरी
की
ख़ुशबू
मार
रही
है
मुझ
को
अपनी
ही
कस्तूरी
की
Naeem Sarmad
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इस
से
पहले
कि
ज़मीं-ज़ाद
शरारत
कर
जाएँ
हम
सितारों
ने
ये
सोचा
है
कि
हिजरत
कर
जाएँ
दौलत-ए-ख़्वाब
हमारे
जो
किसी
काम
न
आई
अब
किसी
को
नहीं
मिलने
की
वसिय्यत
कर
जाएँ
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Idris Babar
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तुम्हारा
बैग
भी
तय्यार
कर
के
रक्खा
है
अकेली
हिज्र
के
आज़ार
क्यूँ
उठाऊँ
मैं
Zahraa Qarar
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हिज्र
में
अब
वो
रात
हुई
है
जिस
में
मुझको
ख़्वाबों
में
रेल
की
पटरी,
चाकू,
रस्सी,
बहती
नदियाँ
दिखती
हैं
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Dipendra Singh 'Raaz'
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कोई
समुंदर,
कोई
नदी
होती
कोई
दरिया
होता
हम
जितने
प्यासे
थे
हमारा
एक
गिलास
से
क्या
होता
ताने
देने
से
और
हम
पे
शक
करने
से
बेहतर
था
गले
लगा
के
तुमने
हिजरत
का
दुख
बाट
लिया
होता
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Tehzeeb Hafi
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आई
होगी
किसी
को
हिज्र
में
मौत
मुझ
को
तो
नींद
भी
नहीं
आती
Akbar Allahabadi
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जनमदिन
हिज्र
का
कुछ
यूँँ
मनाया
किया
अनब्लॉक
तुमको
आज
हमने
Tanoj Dadhich
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मैं
न
कहता
था
हिज्र
कुछ
भी
नहीं
ख़ुद
को
हलकान
कर
रही
थी
तुम
कितने
आराम
से
हैं
हम
दोनों
देखा
बेकार
डर
रही
थी
तुम
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Mehshar Afridi
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तड़पना
हिज्र
तक
सीमित
नहीं
है
उसे
दुल्हन
भी
बनते
देखना
है
Anand Verma
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कितना
भी
दर्द
पिला
दे
ख़ुदा
पी
सकता
हूँ
ज़िन्दगी
हिज्र
से
भर
दे
मिरी
जी
सकता
हूँ
हर
दफ़ा
दिल
पे
ही
खा
के
हुई
है
आदत
ये
बंद
आँखों
से
भी
हर
ज़ख़्म
को
सी
सकता
हूँ
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Faiz Ahmad
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तुम्हारे
चाहने
वाले
हज़ारों
लोग
हैं
लेकिन
हमारे
जैसा
उन
में
कोई
लासानी
हो
तो
जानू
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Aditya
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हुस्न
में
बढ़
गया
जो
नूर
मियाँ
बस
इसी
बात
का
ग़ुरूर
मियाँ
दिल
नहीं
तोड़ने
की
चीज
कोई
तुमको
इतना
नहीं
शऊर
मियाँ
मुझ
सेे
कहते
थे
दूर
मत
होना
हो
गए
ख़ुद
ब
ख़ुद
ही
दूर
मियाँ
मिरा
नंबर
डिलीट
मत
करना
फिर
चढ़ेगा
मिरा
सुरूर
मियाँ
लौट
आना
तुम्हारी
आदत
है
लौट
कर
आओगे
ज़रूर
मियाँ
शहर
ये
है
शरीफ
लोगों
का
फिर
कहाँ
से
उठा
फितूर
मियाँ
इश्क़
ग़लती
थी
मेरी
आँखों
की
दिल
तो
मेरा
था
बेकसूर
मियाँ
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Aditya
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कि
दिल
को
चीर
दिखाने
का
हमको
ज़ौक
नहीं
तेरी
नज़र
में
ग़लत
हैं
तो
हम
ग़लत
ही
सही
Aditya
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ये
जो
कुछ
घर
तुम्हारे
और
मेरे
बीच
में
हैं
ना
कि
लज्जत
इश्क़
में
अपने
इसी
चलते
नहीं
आती
Aditya
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आज
हमको
ख़त्म
कर
देगी
तेरी
नाराज़गी
यार
इतनी
बेसबब
अच्छी
नहीं
नाराज़गी
दिन
के
लम्हे
काट
लेता
हूँ
मैं
तेरी
याद
से
दिल
जलाती
है
मगर
ये
शाम
की
नाराज़गी
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Aditya
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