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Aditya
ki jaise raat chadhti ja rahi hai
ki jaise raat chadhti ja rahi hai | कि जैसे रात चढ़ती जा रही है
- Aditya
कि
जैसे
रात
चढ़ती
जा
रही
है
उदासी
दिल
पे
मेरे
छा
रही
है
तेरी
ख़्वाहिश
में
मैं
तो
जग
रहा
हूँ
तुझे
फिर
नींद
कैसे
आ
रही
है
समझती
है
मुझे
वो
शख़्स
अच्छा
उसे
कोई
हवा
बहका
रही
है
मेरी
चाहत
है
उसको
ख़ुद
में
रक्खूँ
मगर
वो
दूर
होती
जा
रही
है
बहुत
सुलझा
हुआ
सा
शख़्स
हूँ
सो
मुझे
ये
ज़िन्दगी
उलझा
रही
है
- Aditya
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ज़ख़्म
जो
तुम
ने
दिया
वो
इस
लिए
रक्खा
हरा
ज़िंदगी
में
क्या
बचेगा
ज़ख़्म
भर
जाने
के
बाद
Azm Shakri
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ज़िंदगी
यूँँ
हुई
बसर
तन्हा
क़ाफ़िला
साथ
और
सफ़र
तन्हा
Gulzar
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इस
ज़िन्दगी
में
इतनी
फ़राग़त
किसे
नसीब
इतना
न
याद
आ
कि
तुझे
भूल
जाएँ
हम
Ahmad Faraz
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न
लौटोगे
कभी
तुम
जानता
हूँ
ये
मेरी
ज़िंदगी
है
फ़िल्म
थोड़ी
SWAPNIL YADAV 'NIL'
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जान
भी
अब
दिल
पे
वारी
जाएगी
ये
बला
सर
से
उतारी
जाएगी
एक
पल
तुझ
बिन
गुज़रना
है
कठिन
ज़िन्दगी
कैसे
गुज़ारी
जाएगी
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Anjum Rehbar
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मुझे
ख़बर
नहीं
ग़म
क्या
है
और
ख़ुशी
क्या
है
ये
ज़िंदगी
की
है
सूरत
तो
ज़िंदगी
क्या
है
Ahsan Marahravi
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कटती
है
आरज़ू
के
सहारे
पे
ज़िंदगी
कैसे
कहूँ
किसी
की
तमन्ना
न
चाहिए
Shaad Arfi
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ये
मेरी
ज़िद
ही
ग़लत
थी
कि
तुझ
सेा
बन
जाऊँ
मैं
अब
न
अपनी
तरह
हूँ
न
तेरे
जैसा
हूँ
हमारे
बीच
ज़माने
की
बदगुमानी
है
मैं
ज़िंदगी
से
ज़रा
कम
ही
बात
करता
हूँ
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Subhan Asad
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मैं
रोज़
रात
यही
सोच
कर
तो
सोता
हूँ
कि
कल
से
वक़्त
निकालूँगा
ज़िन्दगी
के
लिए
Swapnil Tiwari
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ज़िंदगी
में
आई
वो
जैसे
मेरी
तक़दीर
हो
और
उसी
तक़दीर
से
फिर
चोट
खाना
याद
है
Rohit tewatia 'Ishq'
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झूठ
कहना
मुझे
नहीं
आता
पर
चलो
इज़्तिहाद
करता
हूँ
अब
तेरी
याद
ख़ुद
नहीं
आती
तौर-ए-रस्मन
मैं
याद
करता
हूँ
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Aditya
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मुझे
हैराँ
मुहब्बत
ने
बनाया
परेशाँ
जाँ
मुहब्बत
ने
बनाया
जो
इक
मुश्किल
सफ़र
था
ज़िन्दगी
का
उसे
आसाँ
मुहब्बत
ने
बनाया
ख़ुदा
ने
बस
बनाया
आदमी
था
मुझे
इंसाँ
मुहब्बत
ने
बनाया
समझदारी
जहाँ
भर
ने
सिखाई
मगर
नादाँ
मुहब्बत
ने
बनाया
मेरा
दिल
था
बहुत
खुशहाल
पहले
इसे
वीराँ
मुहब्बत
ने
बनाया
वफ़ा
इक
लफ्ज़
था
मेरे
लिए
बस
जिसे
ईमाँ
मुहब्बत
ने
बनाया
कभी
ख़ुद
बन
गया
था
मैं
ख़ुदा
और
कभी
शैताँ
मुहब्बत
ने
बनाया
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Aditya
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मोहब्बत
में
जो
ग़म
सहते
नहीं
हैं
मुकम्मल
शख़्स
वो
रहते
नहीं
हैं
नहीं
होते
किसी
मतलब
के
आँसू
जो
दरिया
की
तरह
बहते
नहीं
हैं
ज़ुबाँ
है
तो
ज़ुबाँ
से
काम
लो
फिर
वो
मुर्दे
हैं
जो
कुछ
कहते
नहीं
हैं
वो
तूफ़ाँ
है
तो
फिर
डरना
नहीं
है
जो
पर्वत
हैं
कभी
ढहते
नहीं
हैं
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Aditya
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दिन
भर
भूखा
रहकर
ही
तुम
जानोगे
रोटी
का
भी
स्वाद
निराला
होता
है
जिनका
साथ
नहीं
देती
दुनिया
सारी
उनका
ही
बस
ऊपर
वाला
होता
है
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Aditya
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बड़ी
शिद्दत
से
उसके
इश्क़
को
हमने
नकारा
था
मगर
अब
उसकी
यादों
से
तो
हिजरत
ही
नहीं
मिलती
Aditya
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