tumhaare shahar se jab bhi guzarne lagte hain | तुम्हारे शहरस जब भी गुज़रने लगते हैं

  - riyaz aasi
तुम्हारेशहरसजबभीगुज़रनेलगतेहैं
पुरानेज़ख़्महमारेउभरनेलगतेहैं
हसीनहैवोबहुतदेखनेउसेहरशब
सितारेबाम-ए-फ़लकसेउतरनेलगतेहैं
हमारीबज़्ममेंतशरीफ़लातेरहनातुम
इसीबहानेज़राहमसँवरनेलगतेहैं
ख़ुशीमेंयादनहींथाख़ुदाकभीलेकिन
मुसीबतोंमेंख़ुदायादकरनेलगतेहैं
क़याममेंहैंवो'आसी'गुज़रनहींसकते
ख़याल-ए-यारमेंलेकिनगुज़रनेलगतेहैं
  - riyaz aasi
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