मुक़द्दरऔरकितनाआज़माऊँमैं
तुझेजानाहीहैतोक्यूँबुलाऊँमैं
तेरीउम्मीदनेइतनाजलायाहै
हुआदिलराखअबकैसेजलाऊँमैं
समुंदरसूखकरसहराहुआहैअब
मेरीआँखोंकोऔरकितनारुलाऊँमैं
ज़बाँपेतुमभीमेरानामरखतेथे
छुपातोथानहींकुछक्याबताऊँमैं
हाँरोकामरनेसेइकघरकेरिश्तेने
इजाज़तदेतोवोरिश्तानिभाऊँमैं
महकताथाचमनइकगुलमहकनेसे
चलीजादूरतोफिरमुस्कुराऊँमैं